Yemen Port Attack: यमन के अल-मोखा बंदरगाह पर हुआ खतरनाक मिसाइल हमला, कई मजदूर हुए घायल और भारी नुकसान.

यमन के रणनीतिक Al-Mokha port पर रविवार, 9 अगस्त 2026 को हूती मिलिशिया ने एक बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला कर दिया है। इस भयानक हमले की वजह से बंदरगाह की बुनियादी संरचना को भारी नुकसान पहुंचा है और कई बंदरगाह मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यमन के सैन्य सूत्रों ने इस बड़े पैमाने पर हुई तबाही की पुष्टि की है, जबकि बंदरगाह प्रशासन ने सुविधाओं पर व्यापक असर पड़ने की बात कही है।
हमले में इस्तेमाल किए गए 20 से अधिक ड्रोन और मिसाइल
इस सुनियोजित हमले में 20 से ज्यादा ड्रोन स्ट्राइक और बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिन्होंने सीधे तौर पर पोर्ट की सुविधाओं और Al-Yachtal इलाके में बने ट्रेनिंग सेंटर को निशाना बनाया। हूती सैन्य प्रवक्ता Yahya Saree ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है और कहा है कि उनके समूह ने अल-मोखा में सैन्य जमावड़े और हथियारों के गोदामों को निशाना बनाया। इसके विपरीत, यमन के सूचना मंत्रालय के सहायक अवर सचिव Fayyad Al-Nu'man समेत कई अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि इन हमलों का मुख्य मकसद कमर्शियल शिपिंग यानी व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह से ठप करना था। स्थानीय लोगों ने बताया कि यमन की सशस्त्र सेना की एयर डिफेंस ने आने वाले ड्रोन्स का मुकाबला किया, और यह गोलाबारी मुख्य रूप से Al-Hawban और Maqbanah के इलाकों से हो रही थी।
बंदरगाह के डायरेक्टर ने दी नुकसान की जानकारी
अल-मोखा पोर्ट के डायरेक्टर Abdul Malik Al-Sharaabi ने व्यापक नुकसान की जानकारी देते हुए इस बंदरगाह की बेहद अहम स्थिति पर रोशनी डाली। यह बंदरगाह दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्तों में से एक, Bab Al-Mandeb Strait के बेहद करीब स्थित है। उन्होंने पहले ही पिछले हमलों और कामकाज रुकने की वजह से लगभग $800 million यानी 80 करोड़ डॉलर के नुकसान का अनुमान लगाया था, जो इस बात को साफ करता है कि यहां सुधार कार्य और पुनर्वास की कितनी ज्यादा जरूरत है।
क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों में तेजी
यह खतरनाक हमला ऐसे समय में हुआ है जब यमन भर में सैन्य अभियानों की वापसी साफ तौर पर देखी जा रही है। इसके साथ ही क्षेत्रीय तनाव भी काफी ज्यादा बढ़ गया है, जिसमें Al-Dhale'a governorate के उत्तरी मोर्चे पर एक साथ चल रही सैन्य गतिविधियां भी शामिल हैं। इस तरह के लगातार हमलों से आम जनजीवन और वहां काम करने वाले लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, और स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी हुई है।