Yemen Port Attack: यमन के अल-मोखा पोर्ट पर हुआ बड़ा हमला, सात लोगों की मौत के बाद सभी कामकाज अनिश्चितकाल के लिए बंद.

यमन के महत्वपूर्ण बंदरगाह Al-Mokha port पर लगातार हो रहे हमलों के बाद प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। 15 August 2026 को वाणिज्यिक और समुद्री गतिविधियों को पूरी तरह से निलंबित कर दिया गया है। पिछले एक हफ्ते से लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों ने इस बंदरगाह को पूरी तरह से ठप कर दिया है। पोर्ट के डायरेक्टर Abdulmalik al-Sharabi ने इस बात की आधिकारिक पुष्टि की है कि इन भयानक हमलों में कुल 7 लोगों की जान चली गई है, जिसमें 4 सुरक्षाकर्मी और 3 आम कर्मचारी शामिल हैं। इस गोलाबारी की वजह से बंदरगाह को लगभग $16 million यानी 1 करोड़ 60 लाख अमेरिकी डॉलर का भारी नुकसान हुआ है।
हमले की पूरी डिटेल और भारी नुकसान
मिली जानकारी के मुताबिक, अकेले 14 August को ही बंदरगाह पर 6 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इन ताबड़तोड़ हमलों की वजह से पोर्ट पर खड़े 6 लकड़ी के पारंपरिक जहाज और एक बेहद जरूरी पोर्ट एक्सपेंशन ड्रेजर पूरी तरह से जलकर खाक हो गए। इस तबाही का सीधा असर वहां काम करने वाले मजदूरों पर पड़ा है, जिससे करीब 1,300 श्रमिकों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। आम लोग और मजदूर इस स्थिति से बेहद परेशान हैं क्योंकि उनके पास अपनी आजीविका चलाने का कोई दूसरा साधन नहीं बचा है।
सरकारी प्रतिक्रिया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील
यमन की सरकार और सेना के प्रवक्ता कर्नल Majed Al-Nazili ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि यह हमला आम जनता पर दबाव बनाने और देश के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तबाह करने की एक सोची-समझी साजिश है। दूसरी तरफ, हूथी बलों का दावा है कि वे केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार का साफ कहना है कि यह बंदरगाह पूरी तरह से एक नागरिक सुविधा है जिसका सेना से कोई लेना-देना नहीं है।
इस गंभीर संकट से निपटने के लिए अदन में एक विशेष बैठक बुलाई गई। बैठक में सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे हूथी विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों को रोकने के लिए तुरंत और कड़े कदम उठाएं। साथ ही, विद्रोहियों को बाहर से मिलने वाली मदद, खासकर ईरान से मिल रहे समर्थन पर रोक लगाने की मांग की गई है। यमन के सशस्त्र बलों ने इस आक्रामकता का कड़ा जवाब देने की कसम खाई है ताकि देश के महत्वपूर्ण हितों और समुद्री सुरक्षा की रक्षा की जा सके।