Yemen Crisis: ईरान और अमेरिका की लड़ाई का यमन पर असर, कंस्ट्रक्शन का काम रुका और बढ़े पेट्रोल के दाम

Aanya29 July 20262 min read5 viewsYemen
Yemen Crisis: ईरान और अमेरिका की लड़ाई का यमन पर असर, कंस्ट्रक्शन का काम रुका और बढ़े पेट्रोल के दाम

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का असर अब यमन में साफ़ दिखने लगा है। यमन के पूर्वी और दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में चल रहे कई बड़े निर्माण प्रोजेक्ट्स पूरी तरह से ठप हो गए हैं। ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने लोगों की कमर तोड़ दी है और निर्माण सामग्री के दाम भी काफी बढ़ गए हैं।

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ईंधन की कीमतों में भारी उछाल

यमन के ताइज़ में काम करने वाले 46 वर्षीय मजदूर Fuad Mohammed ने बताया कि महंगाई के कारण परिवार का पेट पालना भी मुश्किल हो गया है। यमन में डीजल की कीमतें दोगुना हो गई हैं। जनवरी में 20 लीटर डीजल की कीमत 25,000 यमनी रियाल (17 डॉलर) थी, जो 29 जुलाई 2026 तक बढ़कर 45,000 रियाल (30 डॉलर) तक पहुंच गई है।

क्षेत्रीय तनाव और सैन्य कार्रवाई

फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुए इस युद्ध ने यमन की पहले से खराब स्थिति को और बिगाड़ दिया है। 29 जुलाई 2026 को अमेरिका और सऊदी अरब की सेनाओं ने इराक में ईरान समर्थित मिलिटेंट्स के ठिकानों पर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिससे बसरा का Bushehr International Airport और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए। इसी दिन जॉर्डन की सेना ने भी अपनी सीमा की ओर आ रही 5 ईरानी मिसाइलों को मार गिराया। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 8 जुलाई 2026 को इस युद्ध को समाप्त करने के लिए हुए समझौते को रद्द करने का ऐलान किया था।

ग्लोबल सप्लाई रूट और खतरा

युद्ध के कारण तेल के प्रमुख समुद्री रास्ते खतरे में हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बना हुआ है और यमन के हूतियों ने बाब-अल-मंदेब के रास्ते सऊदी अरब के तेल निर्यात पर नाकेबंदी की घोषणा की है। इन बाधाओं के कारण ईंधन की भारी किल्लत हो गई है और आम लोगों में युद्ध के और भड़कने का डर बना हुआ है।

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