यमन नेशनल डिफेंस काउंसिल का बड़ा फैसला, सशस्त्र बलों को हूथी मिलिशिया के खिलाफ कड़े कदम उठाने का आदेश

यमन की नेशनल डिफेंस काउंसिल ने देश की सेना को हूथी मिलिशिया के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक तेज करने का कड़ा निर्देश दिया है। इस बात की जानकारी कुवैत न्यूज एजेंसी यानी KUNA द्वारा 18 अगस्त 2026 को दी गई थी, जो यह साफ बताती है कि लगातार हो रहे हमलों और तनाव के बीच सरकार अब चुप बैठने के मूड में बिल्कुल नहीं है। यह अहम फैसला कई दौर की आपात बैठकों के बाद लिया गया है, जिसमें राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर महामहिम डॉ. रशाद मोहम्मद अल-अलमी की अध्यक्षता में 8 अगस्त 2026 को हुई बैठक भी शामिल थी, जहां परिषद ने आतंकवाद और हर तरह के खतरों का मुंहतोड़ जवाब देने की बात कही थी।
राष्ट्रपति अल-अलमी का सख्त रुख और सैन्य अभियान
बीते 13 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति अल-अलमी ने यह साफ ऐलान कर दिया था कि हूथी विद्रोहियों की हरकतों को अब और नजरअंदाज नहीं किया जाएगा, और सरकार का मुख्य मकसद देश की सरकारी संस्थाओं को पूरी तरह से बहाल करना है। सरकारी अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भी इस बारे में चेतावनी दी थी कि वे हूथी गुट की तरफ से की जा रही जबरदस्ती और सैन्य दबाव को बिल्कुल स्वीकार नहीं करेंगे। पिछले कुछ दिनों में ज़मीनी स्तर पर सैन्य संघर्ष में भारी तेजी देखने को मिली है, जिसके तहत 16 अगस्त 2026 को यमन की सेना ने ड्रोन, तोपखाने और रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल करते हुए हूथी ठिकानों पर कुल 181 बड़े हमले किए। इसके ठीक बाद 17 अगस्त 2026 को खत्म हुए चौबीस घंटे के भीतर एक और रिपोर्ट सामने आई, जिसमें बताया गया कि सेना ने हूथी ताकतों को कमजोर करने के लिए 133 और सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।
ताइज़ और मारिब में भारी नुकसान और आम नागरिकों की मुश्किलें
यह पूरा संघर्ष इन दिनों कई मोर्चों पर बेहद भयानक रूप ले चुका है, जिसमें ताइज़ और मारिब के इलाकों में लगातार गोलाबारी और ड्रोन हमले हो रहे हैं। राहत वेब की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 15 और 16 अगस्त 2026 को हूथी लड़ाकों ने मारिब के रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे, जिसकी वजह से कई आम नागरिकों के हताहत होने की खबर आई और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। यह हिंसा अचानक नहीं बढ़ी है, बल्कि इससे पहले जुलाई के आखिर में बाब अल-मैंडाब जलडमरूमध्य में तंजानिया के झंडे वाले कार्गो जहाज तिहामाह पर एक खतरनाक हमला किया गया था, जिसमें चार चालक दल के सदस्यों और दो बचाव कर्मियों की जान चली गई थी। इन तमाम गंभीर हालातों को देखते हुए 14 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति अल-अलमी ने ईरान समर्थित इन ताकतों से हथियार डालने और हिंसा छोड़कर एक आम राजनीतिक पार्टी के रूप में मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की थी, हालांकि यमन सरकार लगातार मिल रहे खतरों से निपटने के लिए एक व्यापक सैन्य विकल्प पर पूरी तरह से कायम है। इस पूरी स्थिति की विस्तृत जानकारी आप ReliefWeb Report पर जाकर देख सकते हैं।