यमन में Houthis को मिली कड़ी चुनौती, सरकारी सेना की नई सैन्य ताकत और आधुनिक हथियारों से सुधरे हालात

यमन की राजनीति और सुरक्षा मामलों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां सरकारी सेना लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रही है। यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के उप प्रमुख ने हाल ही में बड़ा बयान देते हुए कहा कि Houthi मिलिशिया को अब सरकारी बलों की नई सैन्य क्षमताओं और आधुनिक हथियारों से कड़ा सबक मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा बलों ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, जिससे विद्रोहियों में हड़कंप मच गया है। सरकारी सेना की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एक ही दिन में दर्जनों सुनियोजित सैन्य अभियानों को अंजाम दिया गया है, जिससे दुश्मन के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। इस बढ़ते सैन्य दबाव के बीच देश की सरकार अपनी खोई हुई जमीन और सरकारी संस्थाओं को वापस पाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध नजर आ रही है।
सैन्य अभियानों में तेजी और नए हथियारों का इस्तेमाल
यमन के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने बताया कि हाल ही में समाप्त हुए चौबीस घंटों के भीतर 133 से अधिक लक्षित और गुणवत्तापूर्ण सैन्य अभियान Houthi ठिकानों के खिलाफ चलाए गए। इससे पहले 17 अगस्त को भी सरकारी बलों ने एक ही दिन में 180 से ज्यादा केंद्रित अभियानों को सफलतापूर्वक पूरा किया था। सरकार ने अपनी ताकत को बढ़ाते हुए युद्ध के मैदान में नए आत्मघाती ड्रोनों को भी शामिल कर लिया है। इन आधुनिक ड्रोनों की मदद से पहाड़ी इलाकों में भी दुश्मनों की गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखी जा रही है और उनके ठिकानों को सटीक तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। सरकार का यह साफ कहना है कि देश में शांति बहाली के लिए केवल सरकारी नियंत्रण ही एकमात्र रास्ता है और किसी भी नए समझौते या पुरानी गलतियों को दोहराने वाले संघर्ष विराम को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर
देश के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख Rashad Al-Alimi ने 19 अगस्त को स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी प्रकार की आक्रामकता का कड़ा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने नागरिक ठिकानों और व्यावसायिक जहाजों पर होने वाले हमलों की कड़ी निंदा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का आभार जताया है। अपनी हालिया कूटनीतिक बैठकों के दौरान, उन्होंने Japan जैसे देशों के साथ मिलकर यमन के तटीय सुरक्षा बलों को मजबूत करने पर चर्चा की है। इस दौरान समुद्री निगरानी, खोज और बचाव अभियानों, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई और तस्करी रोकने जैसे अहम मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की बात कही गई है। अमेरिका द्वारा इस समूह को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने और उनकी वित्तीय संपत्तियों पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा के माहौल में एक बड़ा बदलाव आया है, जिससे सरकारी पक्ष का पलड़ा भारी होता दिख रहा है।