Yemen में फिर भड़की हिंसा, Marib और Taiz में सरकारी सेना ने Houthi विद्रोहियों के कई वाहन किए तबाह.

यमन में क्षेत्रीय तनाव के बीच हालात एक बार फिर से बेहद गंभीर हो गए हैं। ताजा मामलों में सरकारी सेना ने 14 अगस्त 2026 को मारिब प्रांत में हौथी विद्रोहियों के कई सैन्य वाहनों और हथियारों की खेप को पूरी तरह तबाह कर दिया है। स्थानीय जनजातीय नेताओं ने जानकारी दी है कि सेना ने रातभर चली कार्रवाई में भारी तोपखाने का इस्तेमाल किया जिससे विद्रोहियों की हरकतों पर लगाम लगी और वे आगे नहीं बढ़ पाए। इस इलाके में पिछले कुछ दिनों से लगातार सैन्य गतिविधियों में तेजी देखी जा रही है जिससे आम लोगों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
ताइज़ में हुई हिंसक झड़पें और सैनिकों की कैजुअल्टी
मारिब से पहले पड़ोसी प्रांत त़ाइज में भी भयंकर हिंसक झड़पें देखने को मिली थीं। 13 अगस्त 2026 को सरकार समर्थित सैनिकों और ईरान समर्थित विद्रोहियों के बीच हुई सीधी मुठभेड़ में कई सैनिकों के हताहत होने की खबर सामने आई थी। इस लगातार बढ़ते संघर्ष और हिंसा के कारण आम नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और वे सुरक्षित ठिकानों की तलाश करने पर मजबूर हैं। लगातार हो रहे इन हमलों की वजह से पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है और लोग अपने घरों में रहने को मजबूर हैं।
अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता और संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
इस बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने गहरी चिंता व्यक्त की है। यमन के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत Hans Grundberg ने सुरक्षा परिषद को चेतावनी दी है कि देश को साल 2022 के बाद से अब सबसे बड़े पैमाने पर संघर्ष का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने विशेष रूप से मारिब, हद्रमौत और मोखा में चल रहे हमलों का हवाला दिया और तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की ताकि और अधिक सैन्य और नागरिक जीवन के नुकसान को बचाया जा सके।
राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद का बयान और शांति की अपील
सुरक्षा के इन हालात पर प्रतिक्रिया देते हुए यमन की राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के अध्यक्ष Rashad Al-Alimi ने हौथी विद्रोहियों से हथियार डालने और एक राजनीतिक दल के रूप में मुख्यधारा में शामिल होने की कड़ी अपील की है। उन्होंने अस्थायी युद्धविराम के बजाय एक स्थाई शांति समझौते की इच्छा जताते हुए कहा कि सरकार देश की संप्रभुता की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सभी पक्षों पर यह दबाव बना रहा है कि वे सैन्य धमकियों और शिपिंग पर हमलों को बंद करें ताकि क्षेत्र में एक स्थाई युद्धविराम लागू किया जा सके और सरकारी सत्ता को फिर से बहाल किया जा सके।