Yemen: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कड़ा रुख, हूती विद्रोहियों पर हथियारों का प्रतिबंध जारी.

Sushma Kumari7 August 20262 min read48 viewsYemen
Yemen: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का कड़ा रुख, हूती विद्रोहियों पर हथियारों का प्रतिबंध जारी.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 7 अगस्त 2026 को यमन में चल रहे तनाव को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में सुरक्षा परिषद ने साफ तौर पर कहा कि हूती विद्रोहियों को हथियार या किसी भी तरह की मदद पहुंचाना पूरी तरह से गलत है। परिषद ने अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने वाले हूती गुट के मिसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है, जो विशेष रूप से सऊदी अरब और समुद्र में चल रहे व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे थे।

संकट का कारण और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

सुरक्षा परिषद ने रेजोल्यूशन 2216 (Resolution 2216) को दोहराते हुए कहा कि यह प्रस्ताव हूती विद्रोहियों को हथियार, तकनीकी सहायता और किसी भी प्रकार की वित्तीय मदद देने पर रोक लगाता है। इस प्रस्ताव को 14 अप्रैल 2015 को लागू किया गया था। यमन सरकार ने जुलाई की शुरुआत में ही आपातकालीन बैठक की मांग की थी क्योंकि 3 जुलाई 2026 को सना एयरपोर्ट और 13 जुलाई 2026 को होदेदाह एयरपोर्ट पर बिना अनुमति के विमान उतारे गए, जो अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का उल्लंघन है।

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अमेरिकी अधिकारियों ने इस मसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि हूती विद्रोहियों को मिल रही बाहरी मदद, विशेष रूप से ईरान का समर्थन, सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का सीधा उल्लंघन है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी मिशन द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इन हरकतों से यमन की शांति प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

बहरीन की कड़ी चेतावनी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर

सऊदी अरब के नजरां क्षेत्र में हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हमलों के बाद बहरीन के विदेश मंत्रालय ने 7 अगस्त 2026 को अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी। बहरीन ने इन हमलों को आतंकवादी कृत्य बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे हूतियों की फंडिंग और हथियारों के नेटवर्क को पूरी तरह से रोकें। सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार, नागरिक सुविधाओं पर किए गए ये हमले क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा हैं।

सुरक्षा परिषद ने हूती नेता अब्दुल मलिक अल-हूती और अहमद अली अब्दुल्ला सालेह जैसे व्यक्तियों पर यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति जब्त करने जैसे कड़े प्रतिबंध पहले से ही लागू कर रखे हैं। इन प्रतिबंधों का मुख्य उद्देश्य यमन की स्थिरता को बनाए रखना है। इसके अलावा, 14 जुलाई 2026 को पारित रेजोल्यूशन 2826 के तहत, संयुक्त राष्ट्र महासचिव को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वे लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर होने वाले हमलों की हर महीने रिपोर्ट दें। यह रिपोर्टिंग व्यवस्था 15 जनवरी 2027 तक बढ़ा दी गई है।

इन हमलों के चलते न केवल सऊदी अरब और यमन की सीमा पर खतरा बढ़ा है, बल्कि लाल सागर में आने-जाने वाले समुद्री व्यापारिक जहाजों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बात पर सहमत है कि हूतियों को हथियारों की सप्लाई बंद किए बिना इस क्षेत्र में शांति लाना नामुमकिन है।

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