Yemen Crisis: यमन में फिर भड़की हिंसा, हूथी विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच कई मोर्चों पर भीषण झड़पें.

Praggya Singh sabal18 August 20263 min read66 viewsYemen
Yemen Crisis: यमन में फिर भड़की हिंसा, हूथी विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच कई मोर्चों पर भीषण झड़पें.

यमन में सैन्य संघर्ष एक बार फिर बहुत ज्यादा तेज हो गया है, जहां हूथी बलों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के बीच देश के कई हिस्सों में हिंसक झड़पें शुरू हो चुकी हैं। इस बढ़ते तनाव और हिंसा के कारण आम लोगों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है और हालात साल 2022 के समझौते के बाद से सबसे खराब स्थिति में पहुंच गए हैं।

विभिन्न मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई और हमले

मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नुजाइली ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि सरकारी बलों ने पिछले चौबीस घंटों के दौरान हूथी मिलिशिया के खिलाफ कम से कम 133 सैन्य अभियान चलाए हैं। इन ऑपरेशंस का मुख्य उद्देश्य हूथी लड़ाकों और उनकी सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाना था। यह सैन्य कार्रवाई उस दावे के ठीक बाद सामने आई है जिसमें हूथी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल यह्या सरी ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को कहा था कि उनके बलों ने ताज़ प्रांत के अल-माखा (मोखा) बंदरगाह के पास सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के एक लैंडिंग शिप और चार युद्धपोतों पर सटीक हमला किया था। इस हमले में लैंडिंग शिप में भीषण आग लग गई थी और अन्य जहाजों को भी भारी नुकसान पहुंचा था।

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किन-किन इलाकों में हो रही है हिंसा

यमन के कई प्रमुख प्रांतों में इस समय हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। मारिब, अल-जौफ, हद्रमौत, होदेइदाह, ताज़, अल-धले और लाहज जैसे इलाकों में लगातार झड़पें हो रही हैं। ताज़ में लगातार गोलाबारी और मशीन गन से हमले किए जा रहे हैं, जबकि होदेइदाह में लड़ाई मुख्य रूप से हेस और अल-खौखह शहरों के आसपास केंद्रित है। इस भारी हिंसा ने क्षेत्रीय शांति के प्रयासों को बड़ा झटका दिया है और आम नागरिकों की जान को भारी जोखिम में डाल दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की चिंता और मानवाधिकार स्थिति

इस खतरनाक सैन्य escalation ने संयुक्त राष्ट्र सहित पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गहरी चिंता में डाल दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्च कमिश्नर वोल्कर तुर्क ने 17 अगस्त 2026 को नागरिकों की बढ़ती मौतों और घायलों की संख्या पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। सरकारी नियंत्रण वाले इलाकों में हूथी हमलों के कारण 6 अगस्त के बाद से कम से कम 17 नागरिक हताहत हो चुके हैं। इससे पहले 7 अगस्त को मारिब के एक विस्थापन शिविर पर हुए मिसाइल हमले में छह लोग घायल हुए थे, और 9 अगस्त को मोखा बंदरगाह पर हुए ड्रोन व मिसाइल हमलों में तीन श्रमिकों की मौत हो गई थी जबकि चार अन्य घायल हो गए थे। इसके अलावा, 11 अगस्त को बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य में एक मालवाहक जहाज पर हुए हमले में चार लोगों की जान चली गई थी और कई अन्य घायल हो गए थे।

बढ़ते हमलों को देखते हुए वोल्कर तुर्क ने सभी पक्षों से तुरंत संयम बरतने और तनाव को कम करने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि देश में एक बार फिर से पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। संयुक्त राष्ट्र के यमन मामलों के विशेष दूत हैंस ग्रुंडबर्ग ने भी इस बात की पुष्टि की है। यमन की सरकार को जहां सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन का पूरा समर्थन प्राप्त है, वहीं ईरान समर्थित हूथी विद्रोही देश की राजधानी सना पर कब्जा जमाए हुए हैं और दोनों पक्षों के बीच चल रहे इस संघर्ष से खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर भी अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।

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