Yemen News: मारीब शहर पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला, बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से मची तबाही.

यमन की राजधानी और आसपास के इलाकों में एक बार फिर से हिंसा की आग भड़क उठी है, जिससे आम लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। शनिवार, 8 अगस्त 2026 को यमन की सेना ने ईरान समर्थित हूती आंदोलन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सेना का कहना है कि हूती विद्रोहियों ने मारीब शहर पर ताजा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं, जिससे वहां के रिहायशी इलाकों और विस्थापित लोगों के कैंपों को निशाना बनाया गया है। इस लगातार हमले से पूरे इलाके में डर का माहौल बन गया है और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित जगहों की तलाश कर रहे हैं।
मारिब शहर में हमलों से बढ़ी चिंता
यमीनी सेना ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर एक बयान जारी करके बताया कि ये मिसाइलें सीधे तौर पर मारीब शहर के उन इलाकों पर गिरीं जहां आम नागरिक और बेघर लोग रह रहे हैं। यह ताजा हमला शुक्रवार, 7 अगस्त को हुए उन हमलों के बाद सामने आया है, जिसमें कई मिसाइलें और ड्रोन विस्थापित शिविरों पर गिरे थे। यमन के स्वास्थ्य मंत्री कासिम बुहैबेह ने जानकारी दी कि इन शुक्रवार के हमलों में 2 आम नागरिकों की मौत हो गई थी और 14 लोग बुरी तरह घायल हुए थे। इसके अलावा, सरकारी बलों के कम से कम 8 जवान भी मारे गए और 12 अन्य घायल हो गए थे।
सौं अल-जिन्ना कैंप पर निशाना
हूती विद्रोहियों ने खुद यह बात स्वीकार की थी कि उन्होंने यमन के सौं अल-जिन्ना कैंप में सऊदी समर्थित सैनिकों, सैन्य डिपो और गाड़ियों को निशाना बनाया है। उन्होंने इसके लिए मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल किया था। इस हिंसा की शुरुआत गुरुवार, 6 अगस्त को हुई थी जब हूती लड़ाकों ने मारीब और हड्रामौत में यमीनी सेना के कैंपों पर बड़ा हमला किया था। यमन के रक्षा मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की थी कि उस बड़े हमले में सेना के 17 जवानों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हमलों से देश की स्थिति बेहद खराब होती जा रही है।
सेना का पलटवार और सरकारी बयान
इन लगातार हमलों का जवाब देते हुए यमीनी सशस्त्र बलों ने शनिवार को घोषणा की कि उन्होंने कई मोर्चों पर हूती ठिकानों के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया है। यमन के उप सूचना मंत्री मोहम्मद गीजान ने इस बात की पुष्टि की कि हूती विद्रोहियों ने शनिवार को फिर से मिसाइलों और ड्रोनों का इस्तेमाल करके मारीब शहर के आम रिहायशी इलाकों पर गोलाबारी की है। सरकार का यह कदम देश में शांति स्थापित करने और हमलों को रोकने के लिए उठाया गया है।
संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस खतरनाक स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरी चिंता जताई जा रही है। संयुक्त राष्ट्र के यमन के लिए विशेष दूत हंस ग्रुंडबर्ग ने शुक्रवार को कहा कि यमन में अप्रैल 2022 में हुए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले संघर्षविराम के बाद से अब एक बार फिर बड़े पैमाने पर युद्ध शुरू होने का खतरा सबसे ज्यादा मंडरा रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी चेतावनी दी है कि हालिया घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं और शांति प्रयासों को कमजोर कर रही हैं। इससे यह डर पैदा हो गया है कि साल 2022 का वह संघर्षविराम अब पूरी तरह से टूट चुका है।