Yemen Port Attack: यमन के मोखा पोर्ट पर बड़ा हमला, ऑपरेशन सस्पेंड होने से 1300 वर्कर हुए बेरोजगार.

यमन के महत्वपूर्ण रेड सी पोर्ट यानी मोखा पोर्ट पर हाल ही में हुए भीषण हमलों के बाद सभी ऑपरेशन औपचारिक रूप से सस्पेंड कर दिए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इस जांबाज फैसेलिटी पर हुती विद्रोहियों ने ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं जिससे यहाँ काम करने वाले लोगों के सामने रोजी-रोटी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है और करीब 1,300 वर्कर बेरोजगार हो गए हैं।
मोखा पोर्ट पर हुआ करोड़ों का नुकसान
इस खतरनाक हमले में पोर्ट के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और पोर्ट डायरेक्टर ने शुरुआती आकलन में लगभग 16 मिलियन डॉलर के नुकसान की बात कही है। यह बंदरगाह आम नागरिकों के लिए जरूरी सामान पहुँचाने का एक बहुत बड़ा जरिया था लेकिन अब हालात पूरी तरह बिगड़ चुके हैं। इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और विस्फोटक भरी नावों का इस्तेमाल किया गया था जिसमें पोर्ट के सुरक्षाकर्मियों और आम नागरिकों समेत कुल 7 लोगों की मौत हो गई है। इसके अलावा 2 नाविक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश की जा रही है।
यमन सरकार का कड़ा रुख
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने इस घटना के बाद कड़ा रुख अपनाते हुए सख्त जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है। सरकार ने इन हमलों को सीधा आतंकवाद करार दिया है जो बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास समुद्री नौवहन के लिए बहुत बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। यमन की सशस्त्र सेनाओं और नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेस के प्रवक्ताओं ने जानकारी दी कि हुती बलों ने पिछले कुछ दिनों में इस इलाके को निशाना बनाते हुए 40 से ज्यादा मिसाइलें और 46 ड्रोन दागे हैं। दूसरी तरफ हुती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने इन हमलों की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था जिसे सरकारी अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। सरकार का साफ़ कहना है कि इन हमलों में सिर्फ आम नागरिकों की सेवा से जुड़ी सुविधाओं को ही तबाह किया गया है।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता
यह ताजा तनाव ऐसे समय में बढ़ा है जब क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं काफी गहरी हो गई हैं और हाल ही में 15 देशों ने रेड सी के जलमार्गों को सुरक्षित रखने के लिए एक मल्टीनेशनल मैरीटाइम डिफेंस गठबंधन बनाने का कदम उठाया है। विदेश मंत्री अफराह अल-जोउबा ने बयान दिया कि मोखा पर हुए ये हमले सरकार के नियंत्रण को कमजोर करने और हथियारों की तस्करी रोकने के प्रयासों को बाधित करने की एक सोची-समझी कोशिश हैं। बंदरगाह का कामकाज रुकने से अब इस बात का डर सताने लगा है कि साल 2022 में हुए संघर्षविराम के बाद से जो थोड़ी बहुत शांति बनी हुई थी वह कहीं फिर से पूर्ण युद्ध में न बदल जाए।