Yemen का बड़ा बयान: ईरान के विमानों की अवैध लैंडिंग और हूती हमलों की संयुक्त राष्ट्र ने की निंदा

यमन के विदेश मंत्रालय ने 8 अगस्त 2026 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के उस हालिया बयान का स्वागत किया है, जिसमें यमन के सना और होदेदा हवाई अड्डों पर ईरानी विमानों की अवैध लैंडिंग और हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब और व्यावसायिक जहाजों पर किए जा रहे हमलों की कड़ी निंदा की गई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 7 अगस्त 2026 को क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह आधिकारिक बयान जारी किया था।
सुरक्षा परिषद की चिंता और कड़े निर्देश
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि ये गतिविधियां यमन में शांति प्रयासों को कमजोर कर रही हैं और अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। परिषद ने यमन की संप्रभुता, स्वतंत्रता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। परिषद ने साफ शब्दों में कहा है कि यमन के हवाई अड्डों पर आने वाली सभी उड़ानों को यमन सरकार से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है और उन्हें अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नियमों का पालन करना होगा।
मानवीय सहायता की पहुंच के लिए परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि हवाई मार्ग से मदद सुरक्षित और सतत होनी चाहिए, जो यमन सरकार के साथ समन्वय में की जाए। इसके अलावा, परिषद ने सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और रिज़ॉल्यूशन 2216 (2015) का पालन करने का आग्रह किया है, जो हूती जैसे समूहों को हथियारों के हस्तांतरण पर पूरी तरह रोक लगाता है।
घटनाओं का विवरण और सुरक्षा का खतरा
अवैध रूप से ईरानी विमानों की लैंडिंग के मामले 3 जुलाई 2026 को सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और 13 जुलाई 2026 को होदेदा हवाई अड्डे पर दर्ज किए गए थे, जिनमें यमन सरकार की कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। इसके अतिरिक्त, सऊदी अरब के खिलाफ हूती मिसाइल हमले 13 जुलाई 2026 से लगातार जारी हैं, जबकि व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाएं 22 जुलाई 2026 से शुरू हुईं।
इस निंदा प्रस्ताव को संयुक्त राज्य अमेरिका और जापान द्वारा प्रायोजित किया गया था। मतदान के दौरान 11 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि रूस, चीन, अल्जीरिया और मोजाम्बिक ने मतदान से परहेज किया। सुरक्षा परिषद ने चेतावनी देते हुए कहा कि ये गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री आवाजाही के अधिकारों के लिए एक बड़ा खतरा हैं और इससे इलाके में तनाव और भी बढ़ सकता है, जो यमन में शांति बहाली के प्रयासों को नाकाम करने जैसा है।