Yemen Attack: मोचा और मारिब पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला, मिसाइल और ड्रोन गिरने से मची तबाही, 4 लोगों की हुई मौत.

यमन में चल रहे संघर्ष के बीच एक बार फिर से हिंसा बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 15 से 16 अगस्त 2026 के बीच के सप्ताहांत में, यमन की सशस्त्र सेना, जो कि हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है, ने सऊदी समर्थित सरकारी ठिकानों पर भारी हमला कर दिया। इस खतरनाक हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोनों का खुलकर इस्तेमाल किया गया, जिससे आम नागरिकों की जिंदगी पर बहुत बड़ा खतरा मंडरा गया है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, इन हमलों की वजह से कम से कम 4 लोगों की मौत हो गई है और 8 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
रिहायशी इलाकों और बस्तियों को पहुंचाया गया नुकसान
हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए इन हमलों में केवल सैन्य ठिकानों को ही नहीं, बल्कि आम रिहायशी इलाकों, विस्थापन शिविरों और जरूरी नागरिक बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है। मारिब शहर में एक बेकरी को भी इन हमलों में निशाना बनाया गया, जिससे वहां के आम लोगों को खाने-पीने की चीजों के लिए बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लगातार हो रही इन गोलाबारी और हमलों से पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है और लोग सुरक्षित जगहों की तरफ भागने को मजबूर हो गए हैं.
यमन सरकार का पलटवार और 181 सैन्य अभियान
इस खतरनाक escalation के जवाब में, यमन सरकार की सैन्य ताकतों ने भी कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी सेना ने हूती ठिकानों के खिलाफ अलग-अलग गवर्नरेट में कुल 181 जवाबी कार्रवाई की। इन सैन्य अभियानों में हूती पक्ष को भी भारी नुकसान हुआ है और दर्जनों लड़ाकों के हताहत होने की खबर सामने आई है। सरकार का यह कदम देश में शांति बहाल करने और विद्रोहियों के बढ़ते हमलों को रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन इससे जमीन पर तनाव और ज्यादा बढ़ गया है.
Port of Mocha पर कामकाज पूरी तरह ठप
इस भीषण हिंसा की वजह से Port of Mocha पर सभी तरह का कामकाज पूरी तरह से रोक दिया गया है। यह बंदरगाह आम जनता तक भोजन और ईंधन की आपूर्ति पहुंचाने के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण केंद्र है। बंदरगाह के अधिकारियों ने जानकारी दी है कि हालिया संघर्ष के कारण यहाँ लगभग $16 मिलियन (करीब सोलह मिलियन डॉलर) का भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा, 9 अगस्त के बाद से यहाँ काम करने वाले 7 कर्मचारियों की मौत भी हो चुकी है, जिससे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ा है.
आर्थिक स्थिरता और क्षेत्रीय शिपिंग पर मंडराया गंभीर खतरा
प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के चेयरमैन रशाद अल-अलीमी ने इस बात की कड़ी चेतावनी दी है कि बंदरगाह को लगातार निशाना बनाए जाने से क्षेत्रीय शिपिंग और देश की आर्थिक स्थिरता को बहुत बड़ा खतरा पैदा हो गया है। अगर बंदरगाह जल्द ही चालू नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में खाने और ईंधन का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है, जिससे आम आदमी की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ जाएंगी.
मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से गुहार
मारिब प्रांतीय सरकार ने औपचारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यह अपील की है कि वह नागरिक सुविधाओं पर हुए इन हमलों को मानवाधिकार कानून का खुला उल्लंघन मानकर दस्तावेज तैयार करे। दूसरी तरफ, हूती नेतृत्व का यह दावा है कि उनके द्वारा किए गए ये हमले केवल सैन्य हथियारों के गोदामों और सैनिक援दों को ध्यान में रखकर किए गए थे। हालांकि, जमीन पर हो रही इन घटनाओं से क्षेत्र में मानवीय संकट लगातार गहराता जा रहा है.