Yemen Crisis: लाल सागर में हूती हमलों से Yemeni Fishermen का जीना हुआ मुश्किल, जान बचाने के लिए छोड़ रहे हैं मछली पकड़ने का काम

यमन के तटीय इलाकों में रहने वाले मछुआरों के सामने रोजी-रोटी का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है। लाल सागर में लगातार बढ़ रहे खतरों और हूती विद्रोहियों के हमलों की वजह से कई मछुआरों ने अपनी पुश्तैनी आजीविका को छोड़ने का फैसला कर लिया है। अल-Makha यानी मोचा जैसे तटीय शहरों से काम करने वाले ये लोग किसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं, लेकिन लगातार होते हमलों के कारण उन्हें समुद्र से जिंदा वापस लौटने की कोई गारंटी नहीं दिखती। उनके कई साथियों की इन हमलों में जान जा चुकी है, जिससे पूरे इलाके में डर का माहौल बना हुआ है.
लाल सागर में बढ़ा तनाव और जानलेवा हमले
यमन के पास समुद्र में स्थिति उस समय और ज्यादा खतरनाक हो गई जब 11 अगस्त 2026 को तंजानिया के झंडे वाले कार्गो जहाज Tihamah को ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास निशाना बनाया। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 3 क्रू मेंबर्स की मौत हो गई, जिनमें 2 पाकिस्तानी और 1 इंडोनेशियाई नागरिक शामिल थे। इसके अलावा बचाव कार्य में जुटे 2 सुरक्षाकर्मी भी मारे गए। मौजूदा संघर्ष के दौरान शिपिंग जहाजों पर हूती हमलों में लोगों की जान जाने का यह पहला आधिकारिक मामला सामने आया है। इसके साथ ही विद्रोही गुटों ने सरकारी नियंत्रण वाले बंदरगाह शहर मोचा और लाल सागर तट के दूसरे इलाकों पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमले तेज कर दिए हैं, जिसके चलते पिछले सप्ताह के अंत तक कम से कम 7 लोगों की जान चली गई, जिनमें 3 सैनिक भी शामिल हैं.
मछली पालन उद्योग को 15 अरब डॉलर से ज्यादा का नुकसान
यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के परिवहन मंत्रालय ने हूती विद्रोहियों पर वाणिज्यिक जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का सीधा आरोप लगाया है। यमन के तटरक्षक बल ने भी इस हमले और हुई मौतों की पुष्टि की है। मत्स्य पालन क्षेत्र के अवर सचिव Dr. Fawzi Al-Saghir ने 9 अगस्त 2026 को जानकारी दी कि लगातार जारी आक्रामकता और नाकेबंदी के कारण इस सेक्टर को सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से 15 अरब डॉलर से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने बताया कि साल 2015 से लेकर अब तक लगभग 11 बंदरगाहों और मछली उतारने वाले केंद्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया गया है। इन हमलों में 272 से ज्यादा मछुआरों की जान जा चुकी है और 214 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं.
हजारों परिवार हुए विस्थापित, उत्पादन में भारी गिरावट
मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर भी लगातार जुल्म ढाया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2015 से 2023 के बीच 1,458 नौकाओं को हिरासत में लिया गया, 181 को बीच में रोका गया और 493 बोटों को सीधे बमबारी करके उड़ा दिया गया। इन हालातों की वजह से तटीय इलाकों से अनुमानित 50,000 लोग बेघर होकर विस्थापित होने को मजबूर हो गए हैं। मत्स्य धन मंत्रालय के अवर सचिव Ghazi Al-Ahmar ने 11 जुलाई 2026 को बताया कि लाल सागर और अदन की खाड़ी में चल रहे शिपिंग संकट ने तटीय समुदायों की कमर तोड़ दी है। मछली निर्यातकों को अपने शिपमेंट के रूट बदलने पड़ रहे हैं, और संघर्ष तथा भारी सैन्यीकरण के कारण स्थानीय मछुआरों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। युद्ध जैसे इन हालातों के चलते मछली के उत्पादन में लगभग 40 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। समुद्र में लगातार बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों के कारण पारंपरिक मछली पकड़ने के कई रास्ते और क्षेत्र पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं, जिससे मध्य पूर्व में एक बड़े संघर्ष की आशंका लगातार बनी हुई है.