Yemen का बड़ा फैसला, सऊदी अरब की समुद्री सुरक्षा की तारीफ में कही ये बात

यमन की Presidential Leadership Council (PLC) ने क्षेत्रीय शांति और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में Saudi Arabia की भूमिका की जमकर सराहना की है। 7 अगस्त 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में यमन के राष्ट्रपति Dr. Rashad Mohammed Al-Alimi ने रियाद के प्रयासों को सराहते हुए कहा कि सऊदी अरब का सहयोग यमन की सरकारी संस्थाओं को बचाने और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बहुत काम आया है। उन्होंने मानवीय संकट को कम करने और पूरे क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए सऊदी अरब को एक अहम सहयोगी बताया।
सऊदी अरब के नेतृत्व में बना समुद्री सुरक्षा गठबंधन
राष्ट्रपति ने सऊदी अरब के नेतृत्व में हाल ही में बनाए गए नए Multinational Maritime Defense Coalition का स्वागत किया है। इसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। Saudi Ministry of Defence के प्रवक्ता Maj. Gen. Turki Al-Maliki के मुताबिक यह नया गठबंधन वैश्विक आर्थिक हितों की रक्षा करने और समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस गठबंधन का उद्देश्य विशेष रूप से Red Sea, Bab al-Mandab Strait और Gulf of Aden जैसे व्यस्त समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखना है। सऊदी अरब ने इस गठबंधन के कमांडर के तौर पर Rear Admiral Abdullah bin Salem al-Shehri को नियुक्त किया है। इस गठबंधन में यमन समेत कुल 14 देश शामिल हैं, जिनमें Bahrain, Bangladesh, Comoros, Djibouti, Egypt, Jordan, Kuwait, Pakistan, Qatar, Saudi Arabia, Somalia, Sudan और Turkey भी शामिल हैं।
क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियां और सुरक्षा का माहौल
क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं, क्योंकि हाल ही में विद्रोही गुटों की तरफ से हमले तेज हुए हैं। 6 अगस्त 2026 को ईरान समर्थित Houthi rebels के हमले में 30 यमनी सैन्यकर्मियों की जान चली गई। इसी के साथ सऊदी अरब की सीमा से सटे Najran इलाके में भी हूती हमले के चलते 10 से अधिक नागरिक घायल हुए हैं। इन हमलों के बाद से ही समुद्री और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं, जिसे देखते हुए सऊदी अरब ने यह बड़ा कदम उठाया है। Maj. Gen. Turki Al-Maliki ने साफ किया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने की जरूरत को बेहतर समझ रहा है और सभी देश साथ मिलकर इन खतरों का सामना करने के लिए तैयार हैं।