UAE में रहने वाले 44 प्रतिशत अमीर प्रवासी अब यहीं रिटायर होने की बना रहे हैं योजना.

दुबई और आबू धाबी में रहने वाले अमीर प्रवासियों को लेकर एक नया और चौंकाने वाला सर्वे सामने आया है। अब तक लोग यूएई को कुछ सालों की नौकरी के बाद छोड़ने की सोचते थे, लेकिन नया ट्रेंड पूरी तरह बदल गया है। वेल्थ मैनेजर St. James's Place की एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, यूएई में रहने वाले करीब 44% अमीर प्रवासी अब अपनी बाकी की जिंदगी यहीं यानी الإمارات (Emirates) में ही बिताना चाहते हैं। इस सर्वे में मई 2026 के दौरान कुल 450 धनी और हाई-नेट-वर्थ वाले लोगों से बातचीत की गई थी। इस रिपोर्ट की जानकारी सबसे पहले The National और Arabian Business द्वारा 9 सितंबर से 10 सितंबर 2026 के बीच साझा की गई थी, जिसे पत्रकार Katy Gillett और Will Milner ने कवर किया था।
यूएई में क्यों रुकना चाहते हैं लोग
सर्वे में यह बात सामने आई है कि करीब 55% लोगों ने जितने समय तक रहने का सोचा था, वे उससे कहीं ज्यादा समय से यहां रह रहे हैं। इसके अलावा करीब 78% लोगों का मानना है कि वे आने वाले कम से कम आठ साल या उससे ज्यादा समय तक विदेश में ही रहने वाले हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यहां मिलने वाला पैसा और बचत है। सर्वे में शामिल 96% लोगों का कहना है कि वे अपने देश की तुलना में यूएई में ज्यादा कमाई कर रहे हैं। वहीं, 97% लोगों ने माना है कि उनकी मासिक बचत भी अपने देश से बहुत ज्यादा होती है। इनमें से करीब 48% लोगों का ऐसा भी कहना है कि उनकी कमाई और बचत उनके गृह देशों के मुकाबले कम से कम 25% तक ज्यादा है।
फाइनेंशियल प्लानिंग और रिटायरमेंट पर असर
यहाँ रहने का सबसे बड़ा फायदा लोगों की वित्तीय स्थिति पर पड़ा है। करीब 97% प्रवासियों का मानना है कि विदेश में रहने की वजह से उनका आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने का रास्ता बहुत आसान हो गया है। लगभग सभी यानी 98% लोगों को यह लगता है कि यूएई में बिताया गया यह समय उन्हें समय से पहले रिटायर होने का मौका देगा। आंकड़े बताते हैं कि अगर ये लोग अपने देश में ही रहते, तो इनमें से 64% लोगों को आर्थिक रूप से आजाद होने में कम से कम पाँच साल और लग जाते। वहीं, 70% लोगों का यह भी मानना है कि यूएई में रहने के कारण वे अपनी योजना से कम से कम तीन साल पहले ही रिटायर हो सकेंगे। हालांकि, इनमें से 59% लोग ऐसे भी हैं जो भविष्य में अपने वतन वापस लौटने की उम्मीद रखते हैं, लेकिन वे रिटायरमेंट के बाद वहां जाना चाहते हैं ताकि यूएई उनका मुख्य या दूसरा ठिकाना बना रहे।
फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर जानकारी की कमी
इतना सब होने के बावजूद प्रवासियों के सामने एक बड़ी चुनौती भी है। सर्वे में शामिल केवल 27% लोगों ने ही यह माना कि उन्हें क्रॉस-बॉर्डर पेंशन, टैक्स से जुड़े नियमों, जॉब छोड़ने पर मिलने वाले एंड-ऑफ-सर्विस लाभ और उत्तराधिकार के कानूनों जैसी जटिल बातों की पूरी जानकारी है। इस रिपोर्ट पर बात करते हुए SJP एशिया और मिडिल ईस्ट के पार्टनरशिप डायरेक्टर Oliver Wickham ने बताया कि जैसे-जैसे लोग यहाँ लंबे समय तक रहने लगे हैं, उन्हें केवल अधिक वेतन के भरोसे न रहकर एक पक्की और लंबी वित्तीय योजना बनाने की जरूरत है।