अबू धाबी चैंबर और FICCI के बीच समझौता, भारत-यूएई व्यापार को मिलेगी नई रफ्तार
अबू धाबी चैंबर और FICCI ने व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया है। जानें कैसे यह समझौता भारत और यूएई के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच आर्थिक रिश्तों को एक नई मजबूती देने के लिए अबू धाबी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (ADCCI) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) ने एक महत्वपूर्ण सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और निजी क्षेत्र के सहयोग के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार करना है।
मुंबई में आयोजित 'इंडिया-यूएई बिजनेस फोरम' के दौरान इस समझौते को अंतिम रूप दिया गया। इस आयोजन में यूएई और भारत की करीब 114 कंपनियों ने हिस्सा लिया, जहां संयुक्त उद्यमों (joint ventures) और बाजार विस्तार की संभावनाओं पर गहन चर्चा हुई। इस दस्तावेज़ पर अबू धाबी चैंबर के प्रथम उपाध्यक्ष डॉ. अली बिन हरमल अल धाहिरी और FICCI के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य व राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने हस्ताक्षर किए।
व्यापार लक्ष्य और उभरते क्षेत्र
यह साझेदारी ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध तेजी से बढ़ रहे हैं। वित्त वर्ष 2025-2026 में द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। अब यूएई-भारत व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के दम पर 2032 तक इस व्यापार को 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस साझेदारी के जरिए अबू धाबी चैंबर के सदस्यों को भारतीय बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, क्योंकि FICCI भारत का सबसे पुराना और बड़ा व्यापार संगठन है, जिससे 2.5 लाख से अधिक कंपनियां जुड़ी हुई हैं। आंकड़ों की बात करें तो अबू धाबी में भारतीय व्यवसायों की मौजूदगी लगातार बढ़ रही है। अगस्त 2026 तक अबू धाबी चैंबर में 21,085 सक्रिय भारतीय कंपनियां पंजीकृत थीं। साल 2025 में ही 4,642 नई भारतीय कंपनियां इस चैंबर से जुड़ीं, जो पिछले साल के मुकाबले 38.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
डॉ. अली बिन हरमल अल धाहिरी ने बताया कि यह समझौता विशेष रूप से नई अर्थव्यवस्था, उन्नत उद्योगों, तकनीक और वित्त क्षेत्रों में व्यवसायों के लिए जानकारी और साझेदारी के व्यावहारिक रास्ते खोलेगा। वहीं, डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने इसे एक रणनीतिक कदम बताया, जो आर्थिक संबंधों को उभरते क्षेत्रों में बिजनेस-led ग्रोथ की ओर ले जाएगा।