Abu Dhabi: अबू धाबी में 11 महीने फंसे रहे 7 भारतीय नाविक, अब वतन वापसी हुई शुरू.

अबू धाबी के मीना जायद पोर्ट पर पिछले 11 महीने से फंसे सात भारतीय नाविक आखिरकार अपने घर लौट आए हैं। तेल ले जाने वाले टैंकर एमवी सी स्टार 2 पर काम करने वाले इन नाविकों का यह सफर बेहद परेशानी भरा रहा, जिसे खत्म करने में भारतीय दूतावास ने अहम भूमिका निभाई है। 26 अगस्त 2026 को यूएई में स्थित भारतीय दूतावास ने इन सातों क्रू मेंबर की सुरक्षित वतन वापसी की पुष्टि की है और बाकी बचे लोगों को भी जल्द वापस लाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ बातचीत जारी रखी है।
नाविकों की यूनियन ने लगाए गंभीर आरोप
द फेडरेशन ऑफ सीफेरेर्स यूनियंस ऑफ इंडिया यानी एफएसयूआई ने दावा किया कि इन नाविकों को बिना किसी छुट्टी या राहत के लगभग 11 महीने तक जहाज पर ही रोक कर रखा गया था। यूनियन के मुताबिक, जहाज पर अभी भी जो दूसरे क्रू मेंबर फंसे हुए हैं, उन्हें पिछले 5 महीनों से वेतन नहीं मिला है। इसके अलावा, उनके पुराने पैसों में से भी वीजा और यात्रा के नाम पर जबरन पैसे काट लिए गए थे। पोर्ट अधिकारियों ने इन लोगों के जरूरी यात्रा दस्तावेज भी अपने पास रख लिए थे, जिसकी वजह से उनका जहाज छोड़कर बाहर आना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया था.
भारतीय दूतावास और सरकार की कार्रवाई
बीते 25 अगस्त को यूएई स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए इन फंसे हुए नाविकों की भलाई और वापसी के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी थी। इससे पहले एफएसयूआई ने विदेश मंत्रालय, शिपिंग महानिदेशालय, पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय तथा इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट वर्कर्स फेडरेशन से तुरंत दखल देने की अपील की थी। यूनियन ने मांग की थी कि इन लोगों का रुका हुआ पैसा दिलाया जाए और इन्हें तुरंत जहाज से नीचे उतारने की प्रक्रिया पूरी की जाए। इस मामले में अधिक जानकारी के लिए आप विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं.
अंतर्राष्ट्रीय नियमों और सुरक्षा की बात
यह पूरी घटना इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के मैरिटाइम लेबर कन्वेंशन 2006 के तहत आने वाले नियमों और चुनौतियों को सामने लाती है, जो नाविकों की वापसी, मेडिकल सुविधा और समय पर वेतन देने की बात पक्की करते हैं। शिपिंग महानिदेशालय का यह कहना है कि जब भी ऐसी फंसने या छोड़ दिए जाने वाली स्थिति बनती है, तो नाविकों को पीएंडआई इंश्योरेंस के नियमों का इस्तेमाल करना चाहिए और अपनी यूनियनों व दूतावास से संपर्क साधना चाहिए। भारत सरकार भी लगातार यह सलाह देती है कि विदेश जाने वाले नाविक अपने जहाज के मालिक की पूरी जानकारी जांच लें, अपने काम के एग्रीमेंट की कॉपी सुरक्षित रखें और सैलरी मिलने में देरी होने पर तुरंत मदत पोर्टल या पास के भारतीय मिशन में इसकी शिकायत दर्ज कराएं.