Amnesty International की इसराइल को कड़ी चेतावनी, गाजा के गुब्बारों और पतंगों को सैन्य ड्रोन मानना गलत

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने इसराइली कैबिनेट के उस हालिया आदेश की कड़े शब्दों में निंदा की है, जिसमें गाजा पट्टी से छोड़े जाने वाले गुब्बारों और पतंगों को सैन्य ड्रोन की तरह देखने की बात कही गई है। मानवाधिकार संगठन का कहना है कि इस तरह की नीतियों से गाजा के बच्चों के जीवन से खुशी के छोटे-छोटे पल भी छीने जा रहे हैं और यह बच्चों के बचपन के बुनियादी अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। यह निंदा 29 अगस्त 2026 को जारी की गई, जो फिलिस्तानी इलाकों से उड़ने वाले हवाई उपकरणों को लेकर इसराइली नेतृत्व की तरफ से लगातार आ रही चेतावनियों के बाद सामने आई है। आम जनता और बच्चों के लिए इस तरह के खिलौनों पर प्रतिबंध लगना चिंता का विषय बनता जा रहा है।
इसराइल का जीरो टॉलरेंस और जीरो कंटेनमेंट का आदेश
इससे पहले 23 अगस्त 2026 को इसराइली प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और रक्षा मंत्री Israel Katz ने गाजा की तरफ से मिलने वाले खतरों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की थी। इस बैठक के दौरान रक्षा मंत्री Katz ने इसराइल रक्षा बलों यानी IDF को यह सख्त निर्देश दिया था कि किसी भी गुब्ारे, पतंग या ड्रोन पर तुरंत और पूरी ताकत से जवाबी कार्रवाई की जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह घोषणा की थी कि इस मामले में 'जीरो कंटेनमेंट और जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी। मंत्री Katz ने जोर देकर कहा कि इसराइल इन सभी उपकरणों को एक समान खतरे के रूप में देखेगा, भले ही उनमें विस्फोटक सामग्री हो या न हो। आप इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक घोषणा लिंक पर देख सकते हैं। प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ऐसे उपकरण लगातार छोड़े गए, तो सेना की तरफ से लक्षित हमले और तेज किए जाएंगे। साथ ही जिन इलाकों को लॉन्च साइट के रूप में पहचाना जाएगा, वहां के लोगों को भी वहां से हटाया जा सकता है। इस बारे में अधिक जानकारी यहाँ दी गई आधिकारिक विज्ञप्ति में पढ़ी जा सकती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है इस नीति की तीखी आलोचना
इसराइली सरकार के इस सख्त फैसले के बाद दुनिया भर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की प्रवक्ता Ravina Shamdasani ने पतंग उड़ाने के नाम पर लोगों को वहां से भगाने या निकालने की धमकी को बेहद अनुचित बताया है। उन्होंने इसराइली अधिकारियों की भाषा को अस्वीकार्य करार दिया और कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और मानवीय कानूनों के खिलाफ है। दूसरी तरफ, हमास के अधिकारी Bassem Naim ने किसी भी नए हमले की योजना से साफ इनकार किया और इन उपकरणों को बच्चों द्वारा उड़ाए जाने वाले साधारण कागज के हवाई जहाज बताया। फिलिस्तानी राजनीतिक विश्लेषक Mkhaimar Abusada ने भी इस बात पर प्रकाश डाला कि हाल ही में जो पतंगें बरामद हुई हैं और जिन्हें इसराइली सेना ने भी हानिरहित माना है, वे पिछले सालों में इस्तेमाल किए जाने वाले ज्वलनशील उपकरणों से बिल्कुल अलग हैं।
गाजा के आम परिवारों पर पड़ रहा है सीधा असर
28 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट्स से यह बात साफ हो गई कि इस नई नीति का असर जमीन पर तुरंत दिखाई देने लगा है। इसराइली सेना की जवाबी कार्रवाई के डर से गाजा के तमाम माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर खेलने जाने से रोक रहे हैं। लोग डरे हुए हैं कि बच्चों के मामूली खेल को भी सेना द्वारा बड़ा खतरा मानकर हमला न कर दिया जाए। मानवाधिकार संगठनों का मानना है कि इस तरह के सख्त नियमों से आम नागरिकों की जिंदगी और अधिक कठिन हो रही है, जिससे बच्चों का बचपन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर इस तरह की नीतियों का गहरा असर पड़ रहा है और हर कोई आने वाले समय को लेकर चिंतित नजर आ रहा है।