Arab League Meeting: अरब देशों ने की ईरान की हरकतों की निंदा, यूएई और कुवैत समेत कई देशों ने दी चेतावनी।

Aanya7 September 20263 min read15 viewsUAE
Arab League Meeting: अरब देशों ने की ईरान की हरकतों की निंदा, यूएई और कुवैत समेत कई देशों ने दी चेतावनी।

क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर हाल ही में एक बड़ी बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें अरब देशों ने ईरान की military actions पर कड़ी आपत्ति जताई है। 07 सितंबर 2026 को काहिरा में आयोजित अरब लीग की 166वीं नियमित बैठक में यह बड़ा मुद्दा उठाया गया, जहां सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए सभी नेता एक साथ आए।

ईरान समर्थित समूहों पर फूटा गुस्सा

इस महत्वपूर्ण सत्र के दौरान संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, कतर और जॉर्डन ने एक साझा बयान जारी किया। इसमें साफ तौर पर उन हमलों की कड़ी निंदा की गई जो इराकी जमीन से ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों द्वारा किए जा रहे हैं। इन देशों ने इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है और इराक से तुरंत कड़े कदम उठाने की मांग की है ताकि इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके और क्षेत्र में शांति बनी रहे।

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बैठक में शामिल सभी देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा के अपने अधिकार को पूरी तरह से दोहराया। उन्होंने कहा कि वे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखते हैं। अरब लीग के महासचिव नबील फहमी ने इस बात पर जोर दिया कि खाड़ी देशों की सुरक्षा ही पूरे अरब राष्ट्र की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। उन्होंने अरब क्षेत्रों पर होने वाले हमलों को खारिज करते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मदब जलडमरूमध्य में समुद्री नेविगेशन पर मंडरा रहे खतरों को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की।

विभिन्न देशों के नेताओं के बयान

इस बैठक में कई बड़े राजनयिक नेताओं ने अपने विचार रखे। मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती ने राष्ट्रीय राज्य संस्थानों का समर्थन करने पर जोर दिया, जबकि लेबनान के विदेश मंत्री यूसुफ राजी ने एकजुटता दिखाते हुए हथियारों को केवल वैध सरकारी अधिकारियों तक ही सीमित रखने की बात कही। जॉर्डन के विदेश मंत्री आयमन सफादी ने हाशमी संरक्षकता के तहत यरुशलम में पवित्र स्थलों की रक्षा करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। इसके अलावा अल्जीरिया के विदेश मंत्री अहमद अत्ताफ ने संप्रभुता के उल्लंघनों के खिलाफ अपनी बात रखी और ट्यूनीशिया तथा मॉरिटानिया के प्रतिनिधियों ने बड़े संघर्ष से बचने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने की सलाह दी।

यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा कि अब सुरक्षा का माहौल पूरी तरह से बदल चुका है, जिसके चलते रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने की बहुत जरूरत है। वहीं दूसरी ओर, कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल अंसारी ने कहा कि क्षेत्रीय राज्यों को केवल अमेरिका की पार्टनरशिप पर निर्भर रहने के बजाय खुद पर आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

दूसरी तरफ, पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कुवैत के विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबर अल-अहमद अल-सबाह के साथ क्षेत्रीय तनावों पर चर्चा की, जिसमें अमेरिकी संपत्तियों को लेकर ईरान की धमकियां भी शामिल थीं। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलिबाफ के उस बयान के बाद चिंताएं और बढ़ गईं, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर नए हमले होते हैं, तो तेहरान मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाएगा। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर ईरान द्वारा एक समुद्री 'बहिष्करण क्षेत्र' बनाने की योजना की खबरें भी सामने आई हैं, जिस पर सभी की पैनी नजर बनी हुई है।

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