Strait of Hormuz Tension: ईरान की हरकतों पर ऑस्ट्रेलिया भड़का, कुवैत में मिसाइल और ड्रोन हमला हुआ नाकाम.

दुनियाभर में समुद्री रास्तों को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री Richard Marles ने 2 सितंबर 2026 को यह बड़ा बयान दिया कि ईरान द्वारा व्यावसायिक जहाजों के आने-जाने पर रोक लगाना पूरी तरह से गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता है। उन्होंने यह साफ तौर पर कहा कि ईरान के ऐसे कदम समुद्र के कानून से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के नियमों के खिलाफ हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर ईंधन की सप्लाई चेन पर बुरा असर पड़ रहा है। इस मामले की अधिक जानकारी आप आधिकारिक Defence Minister Transcript पर देख सकते हैं।
ईरान का नया फरमान और जहाजों पर कार्रवाई
एक तरफ जहां वैश्विक स्तर पर विरोध हो रहा है, वहीं ईरान की Persian Gulf Strait Authority यानी PGSA ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इस नियामक निकाय की स्थापना इस साल 18 मई 2026 को सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद द्वारा की गई थी। इसी प्राधिकरण ने 2 सितंबर 2026 को 11 और जहाजों को ब्लैकलिस्ट कर दिया, क्योंकि इन पर ईरान के नियमों का पालन न करने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही इस जलमार्ग में प्रतिबंधित किए गए कुल जहाजों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि यदि कोई भी इन ब्लैकलिस्टेड जहाजों की मदद करता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है, जहाज को पकड़ा जा सकता है या जब्त किया जा सकता है। अगर किसी जहाज को इस सूची से बाहर निकलना है, तो उसे औपचारिक आवेदन देना होगा।
कुवैत में हमला और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
क्षेत्रीय हालात तब और ज्यादा बिगड़ गए जब 3 सितंबर 2026 को कुवैत की सेना ने ईरान की तरफ से आए एक मिसाइल और ड्रोन हमले को हवा में ही नाकाम करने की सूचना दी। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने भी 3 सितंबर को यह बयान दिया कि उनका देश ईरान के खिलाफ और अधिक सख्त कदम उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इसके अलावा, मिस्र और चीन ने 3 सितंबर को एक संयुक्त बयान जारी कर बातचीत और राजनीतिक समझौते के जरिए शांति बनाए रखने की अपील की है। उनका कहना है कि लाल सागर की सुरक्षा की जिम्मेदारी वहां के स्थानीय देशों की ही है। अरब लीग ने भी चेतावनी दी है कि ईरान के इन कदमों से पूरे इलाके की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है।
पेरू ने तोड़े संबंध और कूटनीतिक असर
इस बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक रिश्ते भी टूटने लगे हैं। लैटिन अमेरिकी देश पेरू ने 2 सितंबर 2026 को ईरान के साथ अपने सभी diplomatic संबंध आधिकारिक तौर पर तोड़ दिए। पेरू के विदेश मंत्रालय ने ईरान के आक्रामक रवैया, परमाणु जांच में रुकावट डालने और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही रोकने को अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया। इन सभी घटनाओं से पहले रूस द्वारा ईरान को लगातार सैन्य तकनीकी सहायता दिए जाने और सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े जहाजों पर पहले हुए हमलों को लेकर भी चिंता जताई जाती रही है, जिसकी पुष्टि इस Official Ministerial Statement से होती है।