Saudi Arabia में उत्तर प्रदेश के युवा इलेक्ट्रीशियन की मौत, डेढ़ महीना पहले ही गया था कमाने.

सऊदी अरब से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है जहाँ उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक giovane प्रवासी की अचानक मौत हो गई। मरने वाले युवक का नाम Azad Ansari था और उसकी उम्र मात्र 25 वर्ष थी। आज़ाद अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के सपने लेकर करीब डेढ़ महीना पहले ही सऊदी अरब गया था। वह वहाँ एक स्थानीय कंपनी में इलेक्ट्रीशियन के तौर पर काम कर रहा था और अपनी मेहनत के बल पर परिवार कासहारा बनना चाहता था। घर पर उसकी शादी की तैयारियां भी चल रही थीं जो करीब छह महीने पहले तय हुई थी। इस अचानक हुए हादसे से पूरे परिवार में मातम छा गया है और घर के सभी लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना का दिन और कैसे हुआ खुलासा
यह पूरी घटना 31 अगस्त 2026 की सुबह की है। रोज की तरह उस दिन भी सुबह के वक्त कंपनी के अन्य सहकर्मी आज़ाद को ड्यूटी पर ले जाने के लिए उसके कमरे पर पहुंचे। लेकिन आज़ाद ने उनके साथ जाने से मना कर दिया और कहा कि उसके पेट में तेज दर्द हो रहा है इसलिए वह आज कमरे पर ही आराम करेगा। उसके साथियों ने इस बात को सामान्य समझा और काम पर चले गए। लेकिन जब शाम तक आज़ाद से किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया और उसने फोन का जवाब नहीं दिया तो साथियों को चिंता हुई। इसके बाद सहकर्मियों ने उसके कमरे पर जाकर देखा तो वह अपने बिस्तर पर अचेत अवस्था में पड़ा मिला।
कंपनी और परिवार को दी गई सूचना
साथियों ने बिना देर किए इसकी जानकारी तुरंत कंपनी के मैनेजमेंट को दी। कंपनी के अधिकारियों ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए भारत में उसके परिवार वालों को इस मनहूस खबर से अवगत कराया। आज़ाद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के मऊडीह पुलिस स्टेशन क्षेत्र के बरनाई खास गांव का रहने वाला था। जब उसके घर पर यह खबर पहुंची तो कोहराम मच गया। फिलहाल मौत के असली कारणों का आधिकारिक तौर पर अभी तक पता नहीं चल पाया है। स्थानीय पुलिस की जांच और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि मौत की असल वजह क्या थी।
अब आगे क्या होगी प्रक्रिया और शव लाने के नियम
रयाद स्थित भारतीय दूतावास के नियमों के अनुसार किसी भी प्रवासी की मौत के बाद उसके शव को वापस देश यानी भारत लाने के लिए एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसके लिए पुलिस रिपोर्ट, मेडिकल जांच के नतीजे और जरूरी क्लियरेंस होना अनिवार्य है। शव को स्वदेश भेजने के लिए जिन कागजातों की जरूरत पड़ती है उनमें मेडिकल रिपोर्ट, सऊदी का डेथ सर्टिफिकेट, पुलिस रिपोर्ट, मृतक का पासपोर्ट, इक़ामा की कॉपी, परिवार की तरफ से दिया गया पावर ऑफ एक्सीड और स्पॉन्सर का बकाया राशि चुकाने का शपथ पत्र शामिल होता है। नियम के मुताबिक स्पॉन्सर की यह जिम्मेदारी होती है कि वह परिवहन या दफनाने का खर्च उठाए, बशर्ते यह खर्च GOSI इंश्योरेंस या अन्य नीतियों के तहत कवर न हो रहा हो। यदि परिवार को किसी भी तरह की गड़बड़ी या शक होता है तो कानूनी वारिस पावर ऑफ एक्सीड के जरिए मामले की जांच या पोस्टमार्टम की मांग कर सकते हैं।
दूतावास की मदद और बीमा योजना की जानकारी
संकट के समय में सऊदी अरब में मौजूद भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए रियाद स्थित भारतीय दूतावास चौबीस घंटे यानी 24/7 एक्टिव रहता है। किसी भी प्रकार की सहायता के लिए दूतावास के टोल-फ्री नंबर 8002471234 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अलावा लैंडलाइन नंबर 00966-11-4884697 और व्हाट्सएप नंबर 00966-542126748 पर भी मदद मांगी जा सकती है। यदि मृतक के पास वैध प्रवासी भारतीय बीमा योजना यानी PBBY की पॉलिसी थी, तो पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिल सकता है। इस बीमा राशि में शव को वापस लाने का खर्च और साथ आने वाले एक अटेंडेंट का एक तरफ़ का इकोनॉमी क्लास का किराया भी शामिल होता है। परिवार के लोग अब सरकारी मदद से शव के जल्द से जल्द गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं।