Bahrain में विदेशी वर्करों को लेकर उठी कड़ी मांग, जानिए वहां रह रहे भारतीयों पर क्या पड़ेगा असर.

ब बहरीन में इन दिनों विदेशी कामगारों के वर्क परमिट को सीमित करने और स्थानीय नागरिकों को नौकरी में प्राथमिकता देने की मांग जोर पकड़ती जा रही है। इस नए घटनाक्रम से वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों के मन में कई तरह के सवाल उठने लगे हैं क्योंकि भारतीय नागरिक बहरीन में सबसे बड़ा प्रवासी समूह हैं। देश में चल रही इस राजनीतिक चर्चा के बीच आम लोगों और कामगारों के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि क्या सच में कोई नया नियम लागू हो गया है या यह सिर्फ एक विचार है।
बहरीन में क्या चल रहा है नया राजनीतिक प्रस्ताव
हाल ही में श्रम मंत्रालय के दौरे के दौरान सांसद Dr. Muneer Suroor ने विदेशी कर्मचारियों के लिए नए वर्क परमिट पर रोक लगाने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि ऐसा करने से बहरीनीकरण की प्रक्रिया तेज होगी, देश से बाहर जाने वाले पैसों यानी रेमिटेंस में कमी आएगी और वेतन का पैसा राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के अंदर ही सुरक्षित रहेगा। यह बात भारतीय समुदाय के लिए बहुत खास है क्योंकि भारतीय विदेश मंत्रालय और बहरीन स्थित भारतीय दूतावास के 2026 के आंकड़ों के मुताबिक बहरीन में लगभग 3.15 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं। इनमें से कई लोग कंस्ट्रक्शन, कॉन्ट्रैक्टिंग, मेंटेनेंस और विभिन्न स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड सेक्टर में काम कर रहे हैं।
क्या सरकार या लेबर मार्केट रेगुलेटरी अथॉरिटी ने कोई बदलाव किया है
27 अगस्त 2026 तक यह बयान केवल एक व्यक्तिगत सांसद का नीतिगत प्रस्ताव ही है। न तो बहरीन सरकार और न ही लेबर मार्केट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी LMRA ने विदेशी वर्क परमिट पर रोक लगाने, तुरंत कोटा कम करने या भारतीय कर्मचारियों के परमिट रिन्यूअल को बंद करने का कोई नया आदेश जारी किया है। LMRA अपनी सामान्य सेवाएं जैसे नए प्रवासियों के लिए वर्क परमिट, रिन्यूअल, एम्प्लॉयर ट्रांसफर और अन्य परमिट से जुड़ी प्रक्रियाएं पहले की तरह ही चला रही है। वैध वर्क परमिट रखने वाले किसी भी व्यक्ति को सिर्फ इस राजनीतिक बहस के आधार पर परमिट रद्द होने या रिन्यूअल रुकने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। नियोक्ता अभी भी LMRA के एक्सपट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए अपने आवेदन जमा कर सकते हैं।
सांसद के प्रस्ताव और सरकार के लक्ष्य
अपने प्रस्ताव में सांसद ने सुझाव दिया कि बहरीनीकरण की सफलता का अंदाजा सिर्फ कोटे के प्रतिशत से नहीं बल्कि इस बात से लगाया जाना चाहिए कि कितने स्थानीय नागरिकों को स्थाई और अच्छी नौकरी मिल रही है। उन्होंने नियोजकों की मैनपॉवर की जरूरतों को बहरीन में रजिस्टर्ड नौकरी तलाशने वालों के साथ मिलाने और कौशल की कमी को दूर करने के लिए टारगेटेड ट्रेनिंग देने की बात कही है। बहरीन सरकार ने पहले ही 2026 के लिए स्थानीय रोजगार के बड़े लक्ष्य तय कर रखे हैं। जनवरी में क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में कैबिनेट ने श्रम मंत्रालय को इस साल 25,000 बहरीनी नागरिकों को रोजगार दिलाने का निर्देश दिया था जिसमें श्रम बाजार में नए आने वाले 10,000 लोग भी शामिल हैं। सरकार ने पहले यह भी बताया था कि पिछले साल विभिन्न पहलों के जरिए 26,963 स्थानीय नागरिकों को नौकरियां दी गई थीं।
भारतीय प्रवासियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए सलाह
भविष्य में यदि विदेशी परमिट की संख्या या सेक्टर के हिसाब से कोटे में कोई बदलाव होता है तो इसकी जानकारी आधिकारिक सरकारी घोषणाओं के जरिए ही दी जाएगी। बहरीन स्थित भारतीय दूतावास नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को सलाह देता है कि वे देश छोड़ने से पहले आधिकारिक LMRA सिस्टम के जरिए अपने वीज़ा की जांच जरूर करें और अपने मूल रोजगार अनुबंध यानी एम्प्लॉयर कॉन्ट्रैक्ट को सुरक्षित रखें। कामगारों को ऐसे फर्जी भर्ती करने वालों से सावधान रहने की जरूरत है जो परमिट बंद होने का डर दिखाकर उम्मीदवारों पर दबाव बनाते हैं। किसी भी तरह की परमिट से जुड़ी पूछताछ के लिए लोग LMRA के कॉल सेंटर नंबर +973 17506055 पर संपर्क कर सकते हैं।