बलूचिस्तान में छात्र इमरान अली की मौत पर बवाल, स्वतंत्र जांच की उठी मांग.

पाकिस्तानी के बलूचिस्तान प्रांत से एक गंभीर मामला सामने आया है जहाँ 20-year-old बलूच छात्र Imran Ali की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद न्याय की मांग तेज हो गई है। Baloch Yakjehti Committee (BYC) ने इस पूरी घटना की एक निष्पक्ष, स्वतंत्र और तुरंत जांच कराने की पुरजोर मांग उठाई है। इस घटना ने एक बार फिर से सुरक्षा बलों की कार्यप्रणाली और मानवाधिकारों के हनन पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसे लेकर आम लोगों और मानवाधिकार संगठनों में गहरी चिंता का माहौल बना हुआ है।
छात्र की गुमशुदगी और मौत का पूरा मामला
BYC द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी गई जानकारी के मुताबिक, जुमरान केच के रहने वाले असलम के बेटे Imran Ali को पिछले साल August 27, 2025 को क्वेटा से कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया था। इमरान अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए क्वेटा आए थे और A-One City के एक किराए के कमरे में रह रहे थे। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट यानी CTD के जवानों ने उन्हें हिरासत में लिया था और उनके ठिकाने के बारे में लंबे समय तक कोई पुख्ता जानकारी नहीं दी गई थी। परिवार ने लगातार यह अपील की थी कि यदि इमरान पर कोई आरोप है तो उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाए और कानून के मुताबिक निष्पक्ष सुनवाई का मौका दिया जाए।
अधिकारियों का दावा और परिजनों की पीड़ा
करीब एक साल तक इमरान का कुछ भी पता नहीं चल सका और उनका परिवार लगातार उनकी तलाश में भटकता रहा। इसके बाद, लगभग एक साल बीत जाने पर August 6, 2026 को अधिकारियों की तरफ से यह खुलासा किया गया कि इमरान की मौत पिछले साल मई महीने में ही हो चुकी है। सबसे दर्दनाक पहलू यह रहा कि अधिकारियों ने इस घटना की कोई भी सूचना उनके परिवार को नहीं दी और चुपचाप उनके शव को दफना दिया। हालांकि हिरासत से हाल ही में रिहा हुए कुछ अन्य लोगों ने यह पुष्टि की थी कि उन्होंने इमरान को हिरासत के दौरान देखा था। दूसरी ओर, सुरक्षा अधिकारियों का यह कहना है कि इमरान एक सशस्त्र मुठभेड़ के दौरान मारे गए थे, लेकिन इन दावों के बाद भी परिवार और स्थानीय संगठन संतुष्ट नहीं हैं।
संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की चिंता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मांग
इस संवेदनशील मामले में संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने भी गहरी चिंता जताई है और इसे जबरन गायब करने, यातना देने तथा गैर-न्यायिक हत्या का गंभीर मामला बताया है। संयुक्त राष्ट्र के जानकारों ने भी इस मामले में स्वतंत्र जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और मृतक के अवशेषों को उनके परिवार को सम्मान के साथ सौंपने की मांग की है। BYC का यह साफ कहना है कि इमरान अली का पूरा मामला बलूचिस्तान में गैरकानूनी हिरासत, प्रताड़ना और न्यायेतर हत्याओं के लगातार बढ़ रहे एक बड़े चलन को साफ तौर पर दिखाता है। समिति ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से यह अपील की है कि वे इस मामले में अपनी नजर बनाए रखें ताकि बलूच लोगों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई जा सके और पीड़ित परिवार को सच जानने का अधिकार मिल सके।