बलूचिस्तान के नुशकी गर्ल्स कॉलेज में नकाबपोश हमलावरों ने की फायरिंग, तीन छात्राएं घायल
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में नुशकी गर्ल्स कॉलेज पर नकाबपोश हमलावरों ने फायरिंग की, जिसमें तीन छात्राएं घायल हो गईं।

नुशकी (बलूचिस्तान): पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के नुशकी जिले में एक गर्ल्स डिग्री कॉलेज पर सशस्त्र नकाबपोश हमलावरों ने धावा बोल दिया। इस हमले में तीन छात्राओं के घायल होने की खबर है, जिससे इलाके के शिक्षण संस्थानों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं।
कॉलेज प्रशासन के मुताबिक, तीन हथियारबंद हमलावर कॉलेज परिसर के अंदर घुसे। उन्होंने वहां लगे सर्विलांस कैमरों को तोड़ दिया और प्रिंसिपल के दफ्तर में तोड़फोड़ की। इसके बाद हमलावरों ने छात्राओं पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
घायल छात्राओं की पहचान महमूना, मरियम और रुखसाना के रूप में हुई है। उन्हें तुरंत मीर गुल खान नसीर टीचिंग हॉस्पिटल ले जाया गया। रुखसाना की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें इलाज के लिए क्वेटा रेफर कर दिया गया है। हमलावरों के इस हमले के पीछे का मकसद अभी साफ नहीं हो पाया है।
बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि शिक्षण संस्थानों पर बार-बार होने वाले हमलों से छात्रों में डर फैल रहा है और शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि पहले शिक्षकों और प्रोफेसरों को निशाना बनाया गया था और अब छात्राएं इस हिंसा का सामना कर रही हैं।
BSAC के चेयरमैन उजैर बलूच ने इस गोलीबारी की निंदा करते हुए कहा कि क्षेत्र में शिक्षा को रोकने के लिए शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन ने पीड़ितों के लिए न्याय और दोषियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
पत्रकार बहोत बलूच ने इस हमले को बलूच महिलाओं को शिक्षा से दूर रखने की एक साजिश बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कॉलेज के पास सुरक्षा installations होने के बावजूद हमलावर वहां से कैसे फरार हो गए।
इससे पहले बुलेडा के मिनाज़ इलाके में रुझन स्कूल पर भी हमला हुआ था, जहां नकाबपोशों ने सर्विलांस कैमरों पर फायरिंग की थी। स्कूल अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र के कई शिक्षण संस्थानों में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।
द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, 2014 में पंजगुर में एक धार्मिक समूह ने निजी स्कूलों को धमकी दी थी कि वे या तो छात्राओं को हटा दें या स्कूल बंद कर दें। ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान ने दर्ज किया था कि इस डर की वजह से कई स्कूल लंबे समय तक बंद रहे और छात्रों की उपस्थिति काफी कम हो गई। बलूच अधिकार संगठनों ने कई शिक्षकों के अपहरण और हत्याओं की भी रिपोर्ट दी है।