पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला, कई इलाकों में हुई हिंसक घटनाएं.

Praggya Singh sabal14 September 20264 min read31 viewsWorld
पाकिस्तान के बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर बड़ा हमला, कई इलाकों में हुई हिंसक घटनाएं.

पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में वहां से एक बड़ी खबर सामने आई है जहां पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के काफिले पर जोरदार हमला किया गया है। इस हमले की जिम्मेदारी अलग-अलग बलूच संगठनों ने ली है और पूरे इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है। आम जनता के बीच इस घटना को लेकर काफी चर्चा हो रही है और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

अलग-अलग इलाकों में कई बड़े ऑपरेशन

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) और बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने मिलकर पाकिस्तान के कई इलाकों में बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया है। इन संगठनों ने लासबेला, जिवाणी, मशकेल और कच्छी जैसे महत्वपूर्ण इलाकों में हमलों की जिम्मेदारी ली है। इन ऑपरेशनों के दौरान सुरक्षा बलों के काफिले को निशाना बनाने के अलावा चार लोगों की हत्या, लिथियम खोज स्थल पर भारी तोड़फोड़ और सड़कों पर नाकाबंदी जैसी घटनाएं शामिल हैं। बलूचिस्तान के स्थानीय ऑनलाइन समाचार नेटवर्क 'द बलूचिस्तान पोस्ट' के माध्यम से इन घटनाओं की विस्तृत जानकारी सामने आई है।

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सेना के काफिले पर आईईडी और गोलीबारी से हमला

बीएलए के प्रवक्ता जियांद बलूच की तरफ से जारी किए गए बयान में बताया गया कि रविवार को संगठन के विशेष 'फतह स्क्वाड' ने शनिवार सुबह लासबेला के वल्लापत इलाके में पाकिस्तानी सेना की 15 सीमांत बल बम डिस्पोजल पार्टी के काफिले को अपना निशाना बनाया। इस हमले की शुरुआत एक शक्तिशाली आइईडी विस्फोट से हुई थी, जिसके तुरंत बाद अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी गई। संगठन का दावा है कि इस भीषण हमले में सेना के दो वाहन पूरी तरह जलकर खाक हो गए और दो अन्य गाड़ियों को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

दोनों पक्षों के अलग-अलग आंकड़े

संगठन की तरफ से यह भी दावा किया गया कि इस हमले में उनके लड़ाकों ने नौ सैनिकों को मार गिराया और 11 से ज्यादा जवान बुरी तरह घायल हो गए। हालांकि, इस मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों का पक्ष थोड़ा अलग है। अधिकारियों के मुताबिक इस पूरी झड़प में उनके चार सुरक्षाकर्मी मारे गए और सात अन्य लोग घायल हुए हैं। खास बात यह है कि घायलों की इस सूची में एक आम नागरिक भी शामिल है, जिससे स्थानीय लोगों में डर का माहौल देखा जा रहा है।

खुफिया गतिविधियों के आरोप में चार लोगों की हत्या

बीएलए ने एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए जिवाणी में खुफिया आधार पर चलाए गए ऑपरेशन में चार लोगों को मारने का दावा किया है। संगठन का आरोप है कि ये सभी लोग सीधे तौर पर पाकिस्तानी सेना और मिलिट्री इंटेलिजेंस के साथ मिलकर काम कर रहे थे। मारे गए लोगों की पहचान गुलाम मुस्तफा, सनम मसीह, कंवल शहज़ाद और दानिश इक़बाल के रूप में बताई गई है। बलूचिस्तान के इन संगठनों का कहना था कि ये लोग नेशनल लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (NLC) के साथ काम करने की आड़ में खुफिया गतिविधियों में संलिप्त थे। हालांकि, इन तमाम गंभीर आरोपों की किसी भी स्वतंत्र स्रोत से पुष्टि नहीं हो पाई है।

लिथियम खोज साइट पर तोड़फोड़ और आगजनी

एक और बड़ी घटना में मशकेल इलाके को निशाना बनाया गया जहां बलूचिस्तान में हो रही खनिज खोज पर हमला बोला गया। बीएलए के सदस्यों ने वहां चल रहे लिथियम की खोज से जुड़े एक प्रोजेक्ट साइट पर धावा बोल दिया। संगठन के मुताबिक उनके सदस्यों ने साइट पर मौजूद चार ड्रिलिंग मशीनों और पाँच वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस दौरान वहां काम कर रहे कर्मचारियों को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया और बाद में कड़ी चेतावनी देकर छोड़ दिया गया। बलूचिस्तान के इन संगठनों ने साफ कर दिया है कि वे प्रांत में किसी भी तरह की लिथियम खोज या खनन परियोजनाओं का कड़ा विरोध करते हैं और स्थानीय तथा विदेशी कंपनियों को ऐसी जगहों से दूर रहने की सख्त चेतावनी दी है।

सड़कों पर नाकाबंदी और चेकिंग अभियान

दूसरी तरफ, बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) के प्रवक्ता दोस्तैन बलोच ने जानकारी दी कि उनके संगठन के सदस्यों ने रविवार को कच्छी जिले के कई हिस्सों में मुख्य सड़कें पूरी तरह जाम कर दी थीं। इसके अलावा उन्होंने इलाकों में अचानक से चेकिंग अभियान भी चलाया। इस दौरान कई गाड़ियों की बारीकी से तलाशी ली गई और लड़ाकों ने पूरे इलाके में गश्त की। संगठन का यह भी कहना था कि इस अभियान के दौरान उनका सामना किसी भी सरकारी कर्मचारी से नहीं हुआ।

दोनों प्रमुख विद्रोही संगठनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बलूचिस्तान की आजादी का उनका मुख्य लक्ष्य पूरा नहीं हो जाता, तब तक इस तरह के सैन्य और खुफिया अभियान लगातार जारी रहेंगे। इस बीच, खबर लिखे जाने तक पाकिस्तानी सरकार या सेना के अधिकारियों की तरफ से इन सभी बड़े दावों पर कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

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