पाकिस्तान के बलूचिस्तान में बढ़ा तनाव, आतंकवाद के खिलाफ शुरू हुआ नया अभियान.

पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी प्रांत बलूचिस्तान के पश्तून बहुल जिलों में हाल ही में आतंकवादी गतिविधियों में अचानक तेजी देखी गई है। जून 2026 के बाद से इन इलाकों में सुरक्षा हालात काफी खराब हो गए हैं, जिससे पूरे देश में चिंता का माहौल बन गया है। पहले इन इलाकों में उस तरह की हिंसा नहीं होती थी जैसी बलूचिस्तान के बाकी हिस्सों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब यह हिंसा इन शांत इलाकों तक भी पहुंच गई है।
जुलाई का महीना रहा सबसे खतरनाक
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज यानी PICSS की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 इस साल का सबसे खतरनाक महीना साबित हुआ। इस दौरान पूरे प्रांत में कुल 25 हमले हुए और 102 लोगों की जान चली गई। इसके बाद 4 जुलाई से 8 जुलाई के बीच तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी TTP और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी BLA ने मिलकर कई जगहों पर हमले किए, जिसमें 42 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में 38 सुरक्षाकर्मी और 4 आम नागरिक शामिल थे।
लगातार हो रहे हैं हिंसक हमले
हाल ही की घटनाओं की बात करें तो 1 सितंबर को पिशिन जिले के जियारत क्रॉस पर एक कस्टम ऑफिस पर हमला हुआ, जिसकी जिम्मेदारी TTP ने ली थी। इसके बाद 3 सितंबर को BLA ने जियारत जिले से लौट रहे सुरक्षा बलों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें एक दर्जन से ज्यादा सुरक्षाकर्मी मारे गए। इन लगातार हमलों के जवाब में पाकिस्तान की सेना के मीडिया विंग यानी ISPR ने बताया कि सुरक्षा बलों ने 6 और 7 सितंबर को खरन और वाशुक जिलों में खुफिया कार्रवाई के दौरान 11 आतंकवादियों को मार गिराया और उनके पास से 2.9 टन विस्फोटक भी बरामद किया। इसके अलावा ISPR का यह भी दावा है कि जियारत क्रॉस और हाजिका में हुए हमलों के बाद चलाए गए अभियानों में कुल 48 आतंकवादी मारे गए।
सरकार और मानवाधिकार संगठनों की चिंताएं
बढ़ती हिंसा को रोकने के लिए 6 सितंबर को संघीय आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी ने बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुग्ती से मुलाकात की और सुरक्षा को लेकर चर्चा की। मुख्यमंत्री ने हर दिन हो रही मौतों पर गहरी चिंता जताई। संघीय सरकार ने इन सभी आतंकवादी गुटों को 'फितना अल-हिंदुस्तान' करार दिया है और आतंकवाद से निपटने के लिए देश में 'अज्म-ए-इस्तेहकाम' नाम से अभियान चलाया जा रहा है। देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी विदेशी ताकतों से मिल रहे आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने की बात कही है। दूसरी तरफ, जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 63वें सत्र के दौरान पश्तून कार्यकर्ता फजल-उर-रहमान अफरीदी ने पाकिस्तानी सेना पर लोगों को जबरन गायब करने और फर्जी एनकाउंटर जैसे गंभीर आरोप लगाए। बलूचिस्तान मानवाधिकार परिषद के अनुसार, अकेले जुलाई 2026 में लोगों को जबरन गायब करने के 105 मामले और हत्याओं के 59 मामले सामने आए हैं।