शेंगेन देशों में बायोमेट्रिक सिस्टम हुआ लागू, यात्रियों को अब प्रक्रिया हुई आसान

Vandana Upadhyay12 October 20254 min read10 viewsWorld

यूरोपीय संघ (EU) के हवाई अड्डों पर अब सीमा जांच के दौरान बायोमेट्रिक पहचान प्रणाली (biometric recognition system) लागू की जा रही है। जिसकी वजह से शेंगेन देशों की यात्रा करने वाले यात्रियों को अब कम लाइनें और तेज प्रवेश-निकास प्रक्रिया का अनुभव होगा।

पुराना सिस्टम हुआ खत्म, अब डिजिटल एंट्री

12 अक्टूबर से यह नई प्रणाली शुरू हो गई है, जो पासपोर्ट पर हाथ से लगने वाली मुहरों (manual stamping) को पूरी तरह से बदल देगी। कई यात्री इस बदलाव को पसंद कर रहे हैं क्योंकि यात्रियों को पुराना तरीका धीमा और उतना सुविधापूर्ण नहीं लग रहा था। वहीं कुछ लोगों को पासपोर्ट पर लगी मुहरों की याद आ रही है क्योंकि वे उन्हें अपनी यात्राओं की स्मृति-निशानी (souvenir) के रूप में संभालकर रखते थे।

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जानिए किन यात्रियों पर लागू होगा ये सिस्टम

यह नया डिजिटल एंट्री-एग्ज़िट सिस्टम (EES) उन गैर-EU यात्रियों पर लागू होगा जो शेंगेन क्षेत्र में 90 दिनों तक के कम आवास (short stay) के लिए आते हैं। यह व्यवस्था धीरे-धीरे सभी शेंगेन देशों के बॉर्डर पॉइंट्स पर लागू की जाएगी और अप्रैल 2026 तक पूरी तरह से लागू होने की उम्मीद है।

मैनुअल पासपोर्ट स्टैम्पिंग कैसे किया जाता है

मैनुअल सिस्टम में इमिग्रेशन अधिकारी यात्री का वीज़ा चेक करता था, कुछ सवाल पूछता था और फिर पासपोर्ट पर मुहर लगाता था। शारजाह की 18 वर्षीय भारतीय प्रवासी पद्मप्रिय रमन ने बताया कि “यह प्रक्रिया आमतौर पर एक-दो मिनट लेती थी, लेकिन लंबी कतारों की वजह से इंतज़ार बढ़ जाता था।” उन्होंने नौ यूरोपीय देशों फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विट्ज़रलैंड, ऑस्ट्रिया, इटली, लिकटेंस्टीन और वेटिकन सिटी की यात्रा की थी। पद्मप्रिय ने कहा कि “नई प्रणाली समय बचाएगी, लेकिन मैं पासपोर्ट पर लगी मुहरों को मिस करूंगी क्योंकि वे यात्रा की यादें होती हैं। यह छोटी चीज़ है, लेकिन बहुत मायने रखती है।”

डिजिटल सिस्टम से डॉक्यूमेंट्स पर निर्भरता होगी कम 

यूएई निवासी तारिक अनवर, जो अक्सर यूरोप बिजनेस यात्राओं पर जाते हैं, ने कहा कि उन्हें इस खबर से राहत मिली है क्योंकि पुराने सिस्टम में “लंबी लाइनें और बहुत कम काउंटर” होते थे। उन्होंने कहा कि मैनुअल प्रक्रिया पूरी तरह से डॉक्यूमेंट्स पर निर्भर थी, जो खो सकते हैं या क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। नया डिजिटल सिस्टम यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ाएगा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने कहा कि इससे पासपोर्ट जल्दी भरने और बार-बार नवीनीकरण कराने की झंझट भी कम होगी।

नया बायोमेट्रिक सिस्टम कैसे काम करेगा?

12 अक्टूबर के बाद जब कोई गैर-ईयू नागरिक पहली बार शेंगेन क्षेत्र में प्रवेश करेगा, तो उसे अपनी बायोमेट्रिक जानकारी (फोटो, फिंगरप्रिंट और पासपोर्ट डिटेल्स) दर्ज करवानी होगी। सेफीर महमूद, जनरल मैनेजर, स्मार्ट ट्रैवल ग्रुप, के अनुसार पहली बार डेटा दर्ज करने में 10–15 मिनट लग सकते हैं, और कुल मिलाकर यात्री 45 मिनट से एक घंटे तक इमिग्रेशन पर रुक सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पेरिस के चार्ल्स डी गॉल, फ्रैंकफर्ट और एम्स्टर्डम जैसे बिजी हवाई अड्डों पर यह देरी ज़्यादा हो सकती है।

ट्रैवल एजेंट प्रवीण चौधरी (अल सफ़रॉन ट्रैवल एंड टूरिज्म) ने बताया कि कुछ देशों के नागरिक पहले से ही वीज़ा आवेदन के समय बायोमेट्रिक डेटा देते हैं, तो ऐसे यात्रियों को केवल अपना डेटा वेरिफाई करवाना होगा दोबारा देना नहीं पड़ेगा।

यूएई और एयरलाइंस की सलाह

इस बड़े बदलाव से पहले, एमिरेट्स एयरलाइंस ने यात्रियों को सूचित किया कि उनका डेटा सुरक्षित रूप से EES डेटाबेस में तीन वर्षों के लिए संग्रहीत किया जाएगा और यात्रियों को पहली यात्रा के दौरान अधिक समय लेकर एयरपोर्ट पहुंचना चाहिए। एयर अरेबिया ने भी इसी तरह की चेतावनी जारी की कि यह सिस्टम पासपोर्ट स्टैम्पिंग की जगह लेगा और इसमें चेहरे की फोटो और फिंगरप्रिंट स्कैन जैसी अतिरिक्त जांचें होंगी।

यूएई के विदेश मंत्रालय (MOFA) ने भी अमीराती यात्रियों को इस बदलाव की याद दिलाते हुए कहा “पहली बार किसी भी यूरोपीय देश में प्रवेश के समय आपका पासपोर्ट विवरण और बायोमेट्रिक डेटा (फोटो और फिंगरप्रिंट) तीन साल तक के लिए संग्रहीत रहेगा। इसे केवल तब अपडेट करने की जरूरत होगी जब डेटा में बदलाव हो या कोई गलती मिले।” मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि राजनयिक पासपोर्ट धारक (Diplomatic Passport Holders) इस सिस्टम से मुक्त रहेंगे।

 

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