MEA condemns Black Sea attacks on commercial shipping, says India engaging Russia and Ukraine to bring peace

ब्लैक सी में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की भारत ने कड़ी निंदा की है। कई भारतीय चालक दल के सदस्य खतरे में थे, जिनमें से कुछ घायल हुए हैं।

Praggya Singh sabal7 October 20262 min read5 viewsIndia
MEA condemns Black Sea attacks on commercial shipping, says India engaging Russia and Ukraine to bring peace

ब्लैक सी जहाजों पर हमला: रूस और यूक्रेन के बीच जारी तनाव के बीच ब्लैक सी (काला सागर) क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों की एक सीरीज ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। भारत ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है, क्योंकि इन घटनाओं में कई भारतीय नाविकों की जान जोखिम में पड़ गई। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि समुद्री व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाना बेहद खतरनाक है और इसे तुरंत रोका जाना चाहिए।

ब्लैक सी में जहाजों पर हमलों की भारत ने की कड़ी निंदा, शांति के लिए रूस-यूक्रेन से बातचीत जारी

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पिछले 48 घंटों के भीतर इस क्षेत्र में चार अलग-अलग घटनाएं हुई हैं। इन हमलों ने समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इनमें से एक जहाज 'MV Royad Mammadov' पर हमला हुआ, जिसमें तीन भारतीय नागरिक सवार थे। राहत की बात यह है कि सभी सुरक्षित हैं, हालांकि एक व्यक्ति घायल हुआ है और उसका इलाज चल रहा है।

भारतीय नाविकों की स्थिति और अन्य प्रभावित जहाज

जायसवाल ने अन्य जहाजों के बारे में भी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि टोगो ध्वज वाले जहाज 'Alfa Watan' पर हमला हुआ, जिसके चालक दल के बारे में फिलहाल कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। वहीं, पलाऊ ध्वज वाले 'MV ABLE' पर ड्रोन हमला हुआ, जिसमें सात भारतीयों सहित कुल 18 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया गया। इनमें से एक भारतीय घायल है। इसके अलावा, लाइबेरियाई ध्वज वाले तेल टैंकर 'Aframax Rio' पर भी हमला हुआ, जिसमें सवार सभी 23 भारतीय नाविकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है।

भारत ने एक बार फिर दोहराया है कि युद्ध के मैदान में किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला जा सकता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मौकों पर कहा है कि अब समय आ गया है कि 'अंतहीन युद्ध' को समाप्त कर शांति की ओर बढ़ा जाए। भारत इस दिशा में रूस और यूक्रेन दोनों के साथ लगातार संपर्क में है, जिसकी दोनों देशों ने सराहना भी की है। भारत न केवल शांति की वकालत कर रहा है, बल्कि अनाज और ऊर्जा निर्यात जैसे महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्गों को सुरक्षित करने के लिए भी मध्यस्थता की कोशिशें कर रहा है।

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