फ्लाईदुबई विमान में को-पायलट के हमले से विमान को बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छर ने सुनाई आपबीती

फ्लाईदुबई विमान में को-पायलट के हमले से विमान को बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छर ने बताया कि कैसे उन्होंने बेहोश होने से पहले दरवाजा खोला।

Pankhuri Motani18 October 20262 min read7 viewsUAE
फ्लाईदुबई विमान में को-पायलट के हमले से विमान को बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छर ने सुनाई आपबीती

अबू धाबी (यूएई): फ्लाईदुबई विमान में हुए हमले के दौरान विमान को बड़ी तबाही से बचाने वाले कैप्टन स्मित मच्छर ने उस खौफनाक मंजर को याद किया है। उन्होंने बताया कि को-पायलट द्वारा किए गए हमले में उन्हें कई चोटें आईं और कॉकपिट का दरवाजा खोलने से पहले उनकी आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा था।

यूएई के सरकारी अखबार 'द नेशनल' को दिए इंटरव्यू में कैप्टन मच्छर ने बताया कि जब उन पर पहला हमला हुआ, तो उन्हें लगा कि विमान के ढांचे का कोई हिस्सा टूटकर उनके सिर पर गिर गया है। इस झटके से वह लगभग कंट्रोल कॉलम पर गिर गए थे। कुछ ही सेकंड में जब हमले जारी रहे, तब उन्हें अहसास हुआ कि यह उनके साथी पायलट का काम है।

कैप्टन मच्छर ने बताया कि उन्होंने तुरंत खुद को सीट बेल्ट से आजाद किया और सिर पर हो रहे हमलों को रोकने की कोशिश की। इस दौरान उनकी नजरें धुंधली होने लगीं और उन्हें सिर्फ बाहरी आकृतियां ही दिख रही थीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने तुरंत दरवाजा खोलने वाले नॉब को घुमाया और अपने सहयोगियों को मदद के लिए पुकारा, जिसके बाद वह बेहोश होकर कॉकपिट में गिर पड़े।

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विमान जब 17,000 फीट नीचे गिरा, तब इंजन की आवाज कम होना उनके लिए सबसे डरावना अनुभव था। अबू धाबी के जायद मिलिट्री हॉस्पिटल में इलाज करा रहे कैप्टन मच्छर ने कहा कि उन्हें को-पायलट पर पहले से कोई शक नहीं था, वरना वह जमीन पर ही इस बारे में सवाल उठाते। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना के बाद भी विमानन के प्रति उनका प्यार कम नहीं हुआ है।

इस घटना में ओमान के को-पायलट हमम अल-हमामी ने विमान को क्रैश करने की साजिश के तहत कुल्हाड़ी से हमला किया था। कैप्टन मच्छर ने बेहोश होने से पहले कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया था, जिससे यात्री और ऑफ-ड्यूटी क्रू सदस्य अंदर आकर को-पायलट को काबू कर सके।

विमान से हाईजैकिंग का संकट संकेत भेजा गया था, जिसके बाद उसे सऊदी अरब के तबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। विमान को उतारने में यात्रियों ने मदद की और सभी 180 लोग सुरक्षित बाहर निकल आए। इस बहादुरी के लिए इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग ने उन्हें प्रेसिडेंशियल अवार्ड फॉर सिविलियन हीरोइज्म देने की घोषणा की है, वहीं गुजरात सरकार ने उन्हें विशिष्ट गुजरात गरिमा पुरस्कार देने का ऐलान किया है।

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