अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर की घेराबंदी, 60 दिनों में 100 कमर्शियल जहाजों को किया डायवर्ट.

अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने शनिवार, 12 सितंबर 2026 को एक बड़ा ऐलान किया है। अधिकारियों ने बताया कि पिछले 60 दिनों में उनके बलों ने ईरान के बंदरगाहों पर चल रही नौसैनिक नाकाबंदी के दौरान सफलतापूर्व 100 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदल दिया है। इस कड़ी कार्रवाई का असर यह हुआ है कि कोई भी जहाज बिना अमेरिकी सेना की अनुमति के इस नाकाबंदी को पार नहीं कर पाया है। अमेरिकी सैनिक इस मिशन को पूरी सख्ती से अंजाम दे रहे हैं।
स्टील वॉल नाकाबंदी और सैन्य गतिविधियां
ईरान के पानी में आने-जाने वाले कमर्शियल ट्रैफिक को रोकने के लिए इस नाकाबंदी के मौजूदा चरण को स्टील वॉल नाकाबंदी का नाम दिया गया है। इसकी शुरुआत जुलाई 2026 के बीच में हुई थी जो अरब सागर और ओमान की खाड़ी तक फैली हुई है। इस पूरी कार्रवाई को लागू करने के लिए 200 से अधिक अमेरिकी सैन्य विमान और युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जिसमें कई कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी शामिल हैं।
आर्थिक असर और ईरान की प्रतिक्रिया
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को अमेरिका के ट्रेजरी സെക്രട്ടറി स्कॉट बेसेंट ने जानकारी दी कि अमेरिका इस समय ईरान के 85 प्रतिशत टैंकर बेड़े को निशाना बना रहा है। नाकाबंदी के बावजूद बेसेंट ने बताया कि लगातार दो हफ्तों के ऑपरेशन के दौरान होर्मुज जलडममध्य से 140 अरब डॉलर का तेल निकाला गया है। इस आर्थिक दबाव की वजह से ईरान के विदेशी व्यापार में 35 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है और जुलाई 2026 तक वहां की महंगाई दर बढ़कर 66 प्रतिशत पहुंच गई है।
दूसरी तरफ तेहरान ने इस नाकाबंदी को आर्थिक युद्ध करार दिया है। 6 सितंबर 2026 को खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने चेतावनी दी थी कि अगर नाकाबंदी जारी रहती है तो अमेरिकी युद्धपोतों पर और भी बड़े हमले किए जा सकते हैं। ईरान ने होर्मुज जलडममध्य के बाहर एक एक्सक्लूजन जोन बनाने का फैसला भी किया है ताकि वहां से गुजरने वाले जहाजों पर नजर रखी जा सके। 9 और 10 सितंबर 2026 के बीच तनाव तब और बढ़ गया जब ईरानी बलों ने अमेरिकी नौसैनिक संपत्तियों को निशाना बनाने की अपनी कोशिशें तेज कर दीं।