मिडिल ईस्ट में तनाव और चीन के फैसले से कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल
Global crude oil prices surge significantly as US expands military presence in the Middle East and China halts fuel exports.

दुनिया भर के बाजारों में इन दिनों भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई से जुड़ी बड़ी चुनौतियों का असर साफ दिखाई दे रहा है। ताजा घटनाक्रम के तहत क्रूड ऑयल की कीमतों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया है। मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने और चीन द्वारा अपने यहाँ से तेल उत्पादों के निर्यात को रोकने के फैसलों ने वैश्विक बाजार में हलचल पैदा कर दी है।
ब्रेंट क्रूड और डब्लूटीआई में तेजी
बाजार के जानकारों के मुताबिक, इस ताजा बदलाव से ऊर्जा बाजार की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड में भी उछाल देखा गया। विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कम होती सप्लाई के कारण आने वाले दिनों में बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
वैश्विक बाजार में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में अमेरिका द्वारा अपनी सैन्य ताकत को और मजबूत करना है। अमेरिकी रक्षा विभाग से जुड़े घटनाक्रमों और क्षेत्र में अतिरिक्त नौसैनिक बेड़े व सैनिकों की तैनाती की खबरों ने भू-राजनीतिक जोखिमों को बढ़ा दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास सुरक्षा व्यवस्था और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर भी तनाव अपने चरम पर है, जिसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है।
चीन का निर्यात रोकने का फैसला
सप्लाई के मोर्चे पर एक और बड़ा झटका चीन की ओर से आया है। घरेलू स्तर पर भंडार को मजबूत करने के उद्देश्य से चीन ने अपने यहां से डीजल, पेट्रोल और जेट ईंधन जैसे पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है। हांगकांग और मकाऊ को छोड़कर यह नियम सभी क्षेत्रों पर लागू किया गया है। जानकारों का कहना है कि जब दुनिया के बड़े देशों में ऊर्जा की मांग और सप्लाई पहले से ही दबाव में हो, तब इस तरह के फैसलों से बाजार में उथल-पुथल होना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों की रिपोर्ट्स में भी इस बात की चेतावनी दी गई है कि होर्मुज जलडमरूमध्य जैसी संवेदनशील जगहों पर अस्थिरता वैश्विक हाइड्रोकार्बन बाजार के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। उद्योग जगत से जुड़े अधिकारियों में भी बाजार की भविष्य की दिशा को लेकर गहरी चिंताएं बनी हुई हैं।