Deir el-Balah में इजरायली हवाई हमला, तीन साल के मासूम बच्चे समेत दो लोगों की मौत

गाजा के डेर अल-बलह इलाके में इजरायल की तरफ से एक बार फिर बड़ा हमला किया गया है, जिसमें एक तीन साल के मासूम बच्चे और एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी दुख और गुस्सा देखने को मिल रहा है, क्योंकि इस हमले में आम नागरिकों को निशाना बनाया गया था। यह दर्दनाक घटना रविवार, 30 अगस्त 2026 को हुई, जब पश्चिमी डेर अल-बलह में लोगों की भीड़ पर अचानक हवाई हमला हुआ।
हमले में जान गंवाने वालों की पहचान
अल-जज़ीरा इंग्लिश, फिलिस्तीनी समाचार एजेंसी वाफा और स्थानीय गाजा स्वास्थ्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हमले में मारे गए तीन साल के बच्चे का नाम Tayyem Hamdan था। बच्चे ने अस्पताल ले जाने के दौरान या इलाज के वक्त अपने जख्मों के चलते दम तोड़ दिया। इसके अलावा इस हमले में एक और शख्स की मौत हुई जिनकी पहचान Hussam Nusair के रूप में की गई है। यह हमला तब हुआ जब वहां कुछ आम नागरिक आपस में इकट्ठा हुए थे।
इजरायली सेना का पक्ष और संघर्ष विराम की स्थिति
इस पूरे मामले पर इजरायली सेना ने अपनी बात रखते हुए स्वीकार किया कि उन्होंने उस इलाके में हमला किया था। सेना का कहना था कि उनका निशाना एक हमास का मिलिटेंट यानी उग्रवादी था। हालांकि, सेना की तरफ से इस सैन्य कार्रवाई की परिस्थितियों को लेकर और कोई ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई। यह पूरी घटना ऐसे समय में सामने आई है जब वहां अक्टूबर 2025 से एक नाजुक अमेरिकी समर्थित संघर्ष विराम लागू है। हमास के अधिकारियों का आरोप है कि इजरायल लगातार इस समझौते का उल्लंघन कर रहा है और आम लोगों को निशाना बना रहा है।
एंगेजमेंट के नियमों पर उठा विवाद
गाजा में इजरायल के काम करने के तौर-तरीकों और एंगेजमेंट के नियमों को लेकर अगस्त 2026 के पूरे महीने में काफी विवाद बना रहा। कुछ इजरायली सैनिकों ने यह संकेत दिए थे कि नियमों को थोड़ा सख्त किया गया है, जिसके तहत किसी भी संभावित खतरे पर कार्रवाई करने से पहले चीफ ऑफ स्टाफ की मंजूरी लेना जरूरी किया गया था। वहीं दूसरी तरफ, आईडीएफ प्रवक्ता कार्यालय ने सैन्य सुरक्षा के लिए सीधे खतरों से जुड़े नियमों में किसी भी तरह के बदलाव से साफ इनकार किया है। इसके अलावा, 24 अगस्त 2026 को OCHA के संयुक्त राष्ट्र मानवीय अधिकारियों ने फिर से इस बात पर जोर दिया था कि नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे की हर हाल में रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने यह भी साफ किया था कि कानून के दायरे में घातक बल का इस्तेमाल केवल आखिरी विकल्प के रूप में ही किया जाना चाहिए।