Donald Trump की ईरान को सख्त चेतावनी, कहा परमाणु हथियार मिला तो इजराइल और मिडिल ईस्ट का वजूद खत्म हो जाएगा.

खाड़ी देशों और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, और इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को लेकर एक बेहद गंभीर बयान दिया है। 31 अगस्त 2026 को फॉक्स न्यूज को दिए गए साक्षात्कार के दौरान, डोनाल्ड ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार हासिल कर लिए, तो इससे इजराइल और पूरा मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट नक्शे से गायब हो जाएगा। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को हिंसक और क्रूर बताया और जोर देकर कहा कि तेहरान को किसी भी कीमत पर परमाणु क्षमता हासिल करने से रोकना होगा। इस बयान के बाद पूरे इलाके में हलचल तेज हो गई है।
इजराइल और अमेरिका का कड़ा रुख
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान का समर्थन करते हुए इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी साफ कर दिया है कि जब तक वह देश के प्रधानमंत्री पद पर हैं, तब तक ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जाएंगे। एक तरफ जहां राजनीतिक स्तर पर जुबानी जंग तेज है, वहीं दूसरी तरफ क्षेत्रीय स्तर पर अमेरिकी सेना की गतिविधियां भी काफी बढ़ गई हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने आधिकारिक पुष्टि की है कि उसके सैनिकों ने होर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz में लारक द्वीप पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की बारूदी सुरंग बिछाने वाली ताकतों पर सटीक हमले किए। सेना का कहना था कि यह कार्रवाई जहाजरानी के लिए पैदा हो रहे गंभीर खतरे को टालने के लिए की गई थी। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों को आक्रामकता करार दिया था, जिसे अमेरिकी सेना ने सिरे से खारिज कर दिया।
जॉर्डन और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती सख्ती
इस सैन्य टकराव के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला भी रुक नहीं रहा है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने दावा किया कि उसने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। इस दावे के बाद जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने जानकारी दी कि उन्होंने अपने हवाई क्षेत्र में घुसी आठ मिसाइलों को सफलतापूर्व हवा में ही रोक लिया। दूसरी तरफ, अमेरिका ने ईरान पर नकेल कसने के लिए आर्थिक मोर्चे पर भी अपनी रणनीति तेज कर दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने घोषणा की कि वाशिंगटन इस हफ्ते 'ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटस्ट कास्ट' के तहत एक और बैंक पर प्रतिबंध लगाने जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक गणराज्य ईरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करना और उसकी कमाई के सभी रास्तों को ब्लॉक करना है। इस पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ANI की रिपोर्ट में दी गई है, जो यह बताती है कि कैसे सैन्य, कूटनीतिक और आर्थिक तरीकों का इस्तेमाल करके ईरान के प्रभाव को कम करने की कोशिश की जा रही है।