Dubai Airport पर शुरू हुई नई मोबाइल इमिग्रेशन सर्विस, अब मात्र 12 से 15 सेकंड में पूरा होगा काम.

Praggya Singh sabal7 September 20263 min read23 viewsUAE
Dubai Airport पर शुरू हुई नई मोबाइल इमिग्रेशन सर्विस, अब मात्र 12 से 15 सेकंड में पूरा होगा काम.

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। जनरल डायरेक्टर ऑफ रेजिडेंसी एंड फॉरेनर्स अफेयर्स यानी GDRFA Dubai ने एयरपोर्ट पर यात्रियों की प्रक्रिया को और ज्यादा तेज बनाने के लिए 'Click and Travel' नाम से एक नई मोबाइल इमिग्रेशन सर्विस की शुरुआत कर दी है। इस नई व्यवस्था के आने से अब यात्रियों को लंबी लाइनों में खड़े होने से राहत मिलेगी और उनका कीमती समय बचेगा।

कैसे काम करेगी यह नई मोबाइल सर्विस

सोमवार, 7 सितंबर 2026 को आधिकारिक तौर पर लॉन्च की गई इस सर्विस के तहत पासपोर्ट-कंट्रोल अधिकारी अब हाथ में पकड़े जाने वाले छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस यानी हैंडहेल्ड डिवाइस का इस्तेमाल करेंगे। इसकी मदद से अधिकारियों द्वारा सीधे यात्रियों के पास जाकर ही उनके आने यानी अराइवल या जाने यानी डिपार्चर की औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इस पूरी प्रक्रिया में केवल 12 से 15 सेकंड का समय लगेगा। इस तकनीक के जरिए व्यस्त समय के दौरान एयरपोर्ट पर होने वाली भारी भीड़ और ऑपरेशनल दबाव को कम करने में काफी मदद मिलेगी।

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किन यात्रियों को मिलेगा इसका फायदा

अगर आंकड़ों की बात करें तो भारत दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। साल 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च के बीच भारत और इस एयरपोर्ट के बीच कुल 2.5 मिलियन यानी 25 लाख यात्रियों ने सफर किया है, जिसमें मुंबई का रूट सबसे व्यस्त मार्गों में शामिल है। इस नई मोबाइल सर्विस से भारतीय प्रवासियों, परिवारों, बच्चों और खास तौर पर 'डिटरमिनेशन के लोगों' यानी दिव्यांग यात्रियों को बहुत ज्यादा फायदा पहुंचेगा। डिपार्चर यानी जाने के समय यह सेवा यूएई के निवासियों, विजिटर्स और सभी योग्य यात्रियों के लिए उपलब्ध है। वहीं अराइवल यानी आने के समय फिलहाल यह चरण केवल यूएई के नागरिकों और रेजिडेंट्स के लिए ही शुरू किया गया है, जबकि पर्यटकों और विजिट वीज़ा पर आने वालों को अभी पारंपरिक इमिग्रेशन काउंटर का ही इस्तेमाल करना होगा।

अत्याधुनिक तकनीक का किया जा रहा है इस्तेमाल

इस 'Click and Travel' सर्विस में चेहरे की पहचान यानी फेशियल रिकग्निशन, बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, इलेक्ट्रॉनिक पासपोर्ट रीडिंग, ऑटोमैटिक प्री-स्क्रीनिंग और सरकारी डेटाबेस से तुरंत जुड़ने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि यह सर्विस मौजूदा स्मार्ट गेट्स या पारंपरिक काउंटरों की जगह नहीं लेगी, बल्कि यह काम करने का एक अतिरिक्त तरीका है। इस प्रणाली का परीक्षण अक्टूबर 2025 में टर्मिनल 3 पर परिवारों को ध्यान में रखकर शुरू किया गया था, और मई 2026 से 31 अगस्त 2026 के बीच इसका दायरा बढ़ाकर सभी टर्मिनलों पर ट्रायल किया गया, जिसमें कुल 31,373 यात्रियों के ट्रांजैक्शन सफलतापूर्वक पूरे किए गए।

यात्रियों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश

प्रशासन ने साफ तौर पर यह स्पष्ट किया है कि 12 से 15 सेकंड का समय केवल इमिग्रेशन प्रक्रिया का है, न कि पूरे एयरपोर्ट के सफर का। इसलिए सभी यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे एयरलाइन के तय समय और सामान से जुड़े नियमों का पूरी तरह पालन करें। इसके अलावा इस सेवा के आने से वैध पासपोर्ट और वीज़ा की जरूरत खत्म नहीं होती है। यात्रियों को अपना असली पासपोर्ट साथ रखना होगा और यदि बायोमेट्रिक पहचान में कोई दिक्कत आती है तो मैनुअल जांच भी की जा सकती है।

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