इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो को रिश्वतखोरी मामले में पांच साल की जेल, घर में रहेंगे नजरबंद.

Praggya Singh sabal29 August 20264 min read16 viewsWorld
इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो को रिश्वतखोरी मामले में पांच साल की जेल, घर में रहेंगे नजरबंद.

दक्षिण अमेरिकी देश इक्वाडोर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहाँ देश के पूर्व राष्ट्रपति लेनिन मोरेनो को एक चीनी कंपनी से रिश्वत लेने के मामले में दोषी करार दिया गया है। अदालत ने उन्हें पांच साल की जेल की सजा सुनाई है और उनकी शारीरिक स्थिति को देखते हुए उन्हें जेल भेजने के बजाय घर में ही नजरबंद रखकर सजा काटने का बड़ा आदेश दिया है। इस पूरे मामले ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है क्योंकि लैटिन अमेरिकी देशों में बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और कानून अब सख्त कदम उठा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रीय प्रसारण कंपनी एनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक 73 वर्षीय मोरेनो शुक्रवार को अदालत की कार्यवाही के दौरान मौजूद थे और शारीरिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वे चलने में असमर्थ हैं।

कैसे हुआ था इस बड़े भ्रष्टाचार का खेल

यह पूरा मामला उस समय का है जब लेनिन मोरेनो देश के पूर्व राष्ट्रपति राफेल कोरिया के कार्यकाल के दौरान इक्वाडोर के उपराष्ट्रपति पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अदालत के दस्तावेजों और अभियोजन पक्ष के अनुसार वर्ष 2008 से 2018 के बीच एक बड़ा भ्रष्टाचार नेटवर्क पूरी सक्रियता के साथ काम कर रहा था। इस नेटवर्क ने चीन की मशहूर हाइड्रोइलेक्ट्रिक कंपनी सिनोहाइड्रो से जुड़े प्रोजेक्ट की कुल लागत का करीब 4 फीसदी हिस्सा कमीशन के रूप में वसूला था। जांच एजेंसियों ने अदालत में आरोप लगाया कि यह अवैध रकम देश के भीतर और अंतरराष्ट्रीय लेन-देन के जरिए सरकारी अधिकारियों के साथ-साथ मोरेनो और उनके परिवार के अन्य सदस्यों तक पहुंचाई गई थी।

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परिवार के अन्य सदस्य भी आए इस दायरे में

इस हाई-प्रोफाइल मामले में सिर्फ पूर्व राष्ट्रपति ही नहीं फंसे हैं बल्कि कानून का शिकंजा उनके पूरे परिवार पर कसा है। अदालत ने लेनिन मोरेनो की पत्नी और उनकी बेटी को भी इस मामले में दोषी पाया है और दोनों को 30-30 महीने यानी ढाई साल की जेल की सजा सुनाई है। इसके अलावा उनके दो भाइयों और एक जीजा को भी इस भ्रष्टाचार नेटवर्क में शामिल होने का दोषी करार दिया गया है। अदालत ने सभी दोषियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि उन्होंने कथित तौर पर जो अवैध रकम हासिल की थी उसका तीन गुना हिस्सा अगले 90 दिनों के भीतर वापस करना होगा ताकि सरकारी खजाने को हुई क्षति की भरपाई की जा सके।

चीन की कंपनी और हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट से जुड़ा है मामला

यह पूरा कानूनी विवाद चीन की निर्माण कंपनी सिनोहाइड्रो द्वारा बनाए गए कोका कोडो सिंक्लेयर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट से जुड़ा हुआ है। चीनी कंपनी ने वर्ष 2010 में करीब 2 अरब डॉलर की भारी-भरकम लागत वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य शुरू किया था और साल 2016 में इसे औपचारिक रूप से इक्वाडोर सरकार को सौंप दिया था। हालांकि प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद से ही इसकी डिजाइन और निर्माण कार्य में आई कथित तकनीकी खामियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे और जनता के बीच नाराजगी बनी रही। जांच आगे बढ़ने पर पोल खुली कि इस प्रोजेक्ट के ठेके दिलाने में किस तरह से बड़े पैमाने पर रिश्वतखोरी और पैसों का लेन-देन किया गया था।

इक्वाडोर के पूर्व राष्ट्रपतियों का कानूनी इतिहास

आपको बता दें कि लेनिन मोरेनो इक्वाडोर के तीसरे ऐसे पूर्व राष्ट्रपति बन गए हैं जिन्हें भ्रष्टाचार से जुड़े अलग-अलग मामलों में सजा का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि उनके खिलाफ यह मामला राष्ट्रपति बनने के बाद का नहीं बल्कि उनके उपराष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान किए गए कथित अपराधों से जुड़ा हुआ है। उनसे पहले पूर्व राष्ट्रपति राफेल कोरिया को साल 2020 में ब्राजील की निर्माण कंपनी ओडेब्रेक्ट से जुड़े रिश्वतखोरी मामले में आठ साल की सजा सुनाई जा चुकी है। कोरिया पिछले कई सालों से बेल्जियम में रह रहे हैं और वहीं से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति जमिल माहुआद को भी साल 2014 में सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले में आठ साल की सजा सुनाई गई थी, जबकि पूर्व राष्ट्रपति अब्दाला बुकारम भी संगठित अपराध के मामलों में दोषी ठहराए जा चुके हैं। लेनिन मोरेनो ने साल 2007 में राफेल कोरिया की सरकार में उपराष्ट्रपति बनकर मुख्यधारा की राजनीति में कदम रखा था और 2013 तक इस पद पर रहे थे जिसके बाद वे साल 2017 में देश के राष्ट्रपति चुने गए थे।

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