यूरोपीय यूनियन ने अमेरिका के साथ ईरान पर कसा शिकंजा, ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट में हुआ शामिल.

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और अब इसमें यूरोपीय यूनियन ने भी आधिकारिक तौर पर एंट्री कर ली है। 4 सितंबर 2026 को यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेसेंट ने यह बड़ा ऐलान किया कि यूरोपीय यूनियन ने वाशिंगटन के आर्थिक दबाव अभियान, जिसे ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट नाम दिया गया है, उसमें पूरी तरह से साथ देने का फैसला किया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य तेहरान पर लगातार आर्थिक दबाव बनाए रखना है ताकि वह अपनी देश की अस्थिर गतिविधियों को पूरी तरह बंद करे और शांति वार्ताओं के लिए तैयार हो जाए।
ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट के बारे में जानिए
इस अभियान की शुरुआत राष्ट्रपति ट्रंप के निर्देश पर 24 अगस्त 2026 को की गई थी। इसका सबसे बड़ा लक्ष्य ईरानी शासन को मिलने वाले हर एक आर्थिक सहारे को पूरी तरह से काटना है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेसेंट ने G20 वित्त मंत्रियों के साथ हाल ही में हुई बैठक के बाद यह उम्मीद जताई है कि इस मुहिम में ब्रिटेन और संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। इस कैंपेन के तहत विमानन, शिपिंग, सोना, तकनीक और डिजिटल संपत्तियों जैसे कई जरूरी क्षेत्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। इसके साथ ही उन सभी नेटवर्क्स पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है जो ईरान को तेल के परिवहन और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स को पैसा पहुंचाने का काम करते हैं।
अमेरिका की सख्त चेतावनी और वित्तीय पाबंदियां
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने पूरी दुनिया को यह साफ चेतावनी दी है कि जो भी संस्थाएं या लोग ईरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग या प्रतिबंधों से बचने में मदद करेंगे, उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसमें चीनी मुद्रा भुगतान को कंवर्ट करने वाले लोग भी शामिल हैं, जिन पर अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से पूरी तरह बाहर किए जाने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है। इस बारे में अधिक जानकारी आप US Treasury Official Website पर जाकर देख सकते हैं। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इन सख्त पाबंदियों की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में ही पूरी तरह से बैठ सकती है, जिससे वहां की सरकार को अपनी नीतियां बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा।
सैन्य विकल्प और संभावित परिणाम
केवल आर्थिक पाबंदियों तक ही बात सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका के उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने 3 सितंबर 2026 को यह साफ कर दिया था कि ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बनाने समेत सभी विकल्प अभी भी खुले रखे गए हैं। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने भी यह बात कही कि अगर ईरान के साथ कोई नया संघर्ष शुरू होता है, तो वह बहुत लंबी अवधि तक नहीं चलेगा। अमेरिकी प्रशासन लगातार इस कोशिश में लगा है कि किसी तरह ईरान को अपने रास्ते से हटाया जाए और मध्य पूर्व में शांति बहाल की जा सके।