गाजा में शांति बोर्ड फेल, इसराइल के हमलों और सीजफायर टूटने के खतरे से सहमे लोग.

गाजा में युद्ध रोकने और वहां के हालात सुधारने के लिए बनाई गई योजना पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक खुली बैठक में अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों के संगठन ने साफ कह दिया है कि गाजा बोर्ड ऑफ पीस यानी शांति बोर्ड अपने काम में पूरी तरह से विफल साबित हो रहा है। इस बैठक में अधिकारियों ने बताया कि इसराइली हमलों की वजह से लगातार फिलिस्तीनी नागरिकों की जान जा रही है और राहत कार्य भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। आम लोगों का जीवन वहां बहुत ज्यादा मुश्किल हो गया है और वे रोजाना जानमाल के नुकसान का सामना कर रहे हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी और सीजफायर का संकट
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सत्र के दौरान मध्य पूर्व के लिए उच्च प्रतिनिधि Nickolay Mladenov ने चेतावनी दी कि अगर इसराइल और हमास के बीच हुआ सीजफायर पूरी तरह से टूटता है, तो स्थिति वापस न आने वाले मोड़ पर पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा लड़ाई शुरू होती है, तो गाजा के पुनर्निर्माण और प्रशासन का पूरा प्लान धरे का धरे रह जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि हमास ने अभी तक उन सभी शर्तों को पूरी तरह से लागू नहीं किया है, जो पिछले महीने 30 जुलाई को तय हुए रोडमैप के तहत तय की गई थीं। इसके अलावा कार्यकारी विशेष समन्वयक Ramiz Alakbarov ने जानकारी दी कि वहां का संघर्ष विराम बहुत ज्यादा कमजोर स्थिति में है। पिछले महीने की 12 अगस्त से अब तक इस संघर्ष में 100 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 400 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालात इतने खराब हैं कि गाजा का दो-तिहाई हिस्सा राहत सामग्री पहुंचाने वालों के लिए पूरी तरह से बंद पड़ा है और इस साल की मानवीय सहायता अपील का केवल 40 प्रतिशत हिस्सा ही फंड के रूप में मिल पाया है।
जमीनी हालात और विस्थापितों पर हमले
क्षेत्र में हिंसा की घटनाएं लगातार जारी हैं। दक्षिणी गाजा में विस्थापितों के एक तंबू पर हुए इसराइली हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और कम से कम चार लोग बुरी तरह जख्मी हो गए। इसराइली सेना का दावा है कि उनका निशाना एक सैन्य ऑपरेटिव पर था। दूसरी तरफ वेस्ट बैंक के हालात भी लगातार बदतर होते जा रहे हैं। वहां नई बस्तियों को बसाने का काम तेजी से चल रहा है और ई1 क्षेत्र में 1,200 से ज्यादा अवैध घरों के निर्माण के लिए नए टेंडर जारी किए गए हैं। इसके अलावा पूर्वी यरुशलम में संयुक्त राष्ट्र राहत एवं कार्य एजेंसी यानी UNRWA के कलंदिया ट्रेनिंग सेंटर को अपने कब्जे में लेने और पूर्व सुरक्षा कैदियों के घरों पर छापेमारी जैसी घटनाओं ने तनाव को और ज्यादा बढ़ा दिया है। इन छापों के दौरान अधिकारियों ने उन फंडों को भी जब्त कर लिया जो कथित तौर पर फिलिस्तीनी प्राधिकरण के लाभ से जुड़े बताए जा रहे थे।
बोर्ड ऑफ पीस और सहायता संगठनों की चिंताएं
यह शांति बोर्ड पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा स्थापित किया गया था, जिसका मुख्य काम गाजा प्रशासन के लिए राष्ट्रीय समिति की देखरेख करना है। हालांकि इस तमाम जिम्मेदारी के बावजूद अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों ने इसराइल के नए नियमों को लेकर गहरी चिंता जताई है। नए नियमों के तहत कर्मचारियों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने के लिए कहा जा रहा है, जिससे स्थानीय फिलिस्तीनी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा खतरा पैदा हो गया है। इस बोर्ड में शामिल होने वाले सदस्य देशों के लिए 1 अरब अमेरिकी डॉलर का योगदान देना अनिवार्य किया गया है। अब पूरी दुनिया की निगाहें अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर टिकी हैं कि वे किस तरह से इस बड़े मानवीय संकट को दूर करते हैं और चल रही सैन्य हिंसा को रोककर आम नागरिकों को राहत दिलाते हैं।