Gaza Hunger Crisis: गाजा में भूखमरी का संकट या मोटापे की समस्या, आंकड़े छिपा रहे हैं बच्चों की असली तस्वीर.

गाजा में चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों ने वहां तीव्र कुपोषण के मामलों में आई कमी का हवाला दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि अब गाजा में कोई भूखमरी का संकट नहीं बचा है, बल्कि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस इलाके में अब 'मोटापे की समस्या' मौजूद है। इस पूरे मामले की सच्चाई जानने के लिए अल जजीरा की पत्रकार नादा कद्दूरा ने उन आंकड़ों की गहराई से जांच की है, जिन्हें आधिकारिक बयानों में अक्सर छोड़ दिया जाता है। इस रिपोर्ट में गाजा के बच्चों की उस गंभीर चिकित्सीय वास्तविकता को सामने लाया गया है, जिससे रोजाना वहां के अस्पताल और डॉक्टर जूझ रहे हैं।
द लैंसेट की स्टडी और बच्चों के आंकड़े
यूएनआरडब्ल्यूए (UNRWA) के शोधकर्ताओं द्वारा द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक, अगस्त 2025 तक गाजा में पांच साल से कम उम्र के 54,600 से अधिक बच्चे गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार थे। जनवरी 2024 से अगस्त 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला कि जांच किए गए बच्चों में से 15.8 प्रतिशत बच्चे तीव्र कुपोषण से पीड़ित थे। इन आंकड़ों से यह भी साफ हुआ कि कुपोषण की दर सीधे तौर पर उस राहत सामग्री की मात्रा से जुड़ी हुई है, जिसे गाजा में प्रवेश करने की अनुमति दी जाती है। नासिर अस्पताल के डॉक्टर बताते हैं कि वहां बच्चों के विकास में रुकावट यानी स्टंटिंग के मामलों में भारी बढ़ोतरी हुई है। अस्पताल में हर रोज 3 से 10 नए मामले ऐसे आ रहे हैं, जो युद्ध से पहले के समय की तुलना में बहुत ज्यादा हैं।
यूनिसेफ सर्वे और क्रॉनिक कुपोषण
जून 2026 में किए गए एक यूनिसेफ सर्वे में हालांकि तीव्र कुपोषण के मामलों में गिरावट दर्ज की गई और यह आंकड़ा गिरकर लगभग एक प्रतिशत पर आ गया, लेकिन इस सर्वे में एक और डरावनी बात सामने आई। सर्वे के अनुसार, करीब 12.2 प्रतिशत बच्चे क्रॉनिक कुपोषण यानी लंबे समय से चले आ रहे कुपोषण या स्टंटिंग का शिकार हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समस्या बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकती है। इसके अलावा, 23 जुलाई 2026 को जारी एक आईपीसी (IPC) विश्लेषण में यह आशंका जताई गई है कि अप्रैल 2027 तक पांच साल से कम उम्र के 74,000 से अधिक बच्चे तीव्र कुपोषण का सामना करेंगे। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गाजा की कुल आबादी का 67 प्रतिशत हिस्सा यानी 14 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं।
आधिकारिक बयान और स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़े
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पहले भी भुखमरी के दावों को खारिज करते हुए उन्हें हमास द्वारा फैलाए गए 'झूठ' करार दिया है। इसके साथ ही कॉगट (COGAT) ने भुखमरी के आंकड़ों को इजरायल को बदनाम करने वाला एक 'सुनियोजित अभियान' बताया है और आईपीसी के निष्कर्षों को 'विकृत और भ्रामक' कहकर खारिज कर दिया है। दूसरी तरफ, गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कुपोषण से जुड़ी जटिलताओं की वजह से अब तक 461 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 157 बच्चे भी शामिल हैं। कोलंबिया, स्टैनफोर्ड और आगा खान यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं समेत कई संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञ और शिक्षाविद् लगातार यह कह रहे हैं कि गाजा के बच्चों को इस चल रहे भुखमरी संकट से बचाने के लिए तत्काल और निरंतर मानवीय सहायता की बहुत जरूरत है।