गाजा में इजरायली हमलों में पांच फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत, संघर्ष जारी रहने से बढ़ा तनाव

Sushma Kumari7 September 20262 min read17 viewsWorld
गाजा में इजरायली हमलों में पांच फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत, संघर्ष जारी रहने से बढ़ा तनाव

गाजा सिटी और दीर अल-बलाह में हुए इजरायली सैन्य हमलों में एक बच्ची और एक लड़के समेत कम से कम पांच फिलिस्तीनी नागरिकों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटनाएं एक ऐसे समय में सामने आई हैं जब इस क्षेत्र में लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। 7 अक्टूबर 2023 से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक कुल 73,651 लोगों की मौत हो चुकी है और 174,592 लोग घायल हुए हैं। आम लोगों पर लगातार हो रहे इन हमलों से आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और इलाके में डर का माहौल बना हुआ है।

गाजा में हालिया हमलों का पूरा विवरण

ताजा मामलों में, पश्चिमी गाजा सिटी में 6 सितंबर 2026 को एक वाहन को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में युसूफ अकीला और उनकी 8 साल की बेटी वफा अकीला की मौत हो गई। इसके अलावा, विस्थापित परिवारों को आश्रय देने वाले एक स्कूल के पास इजरायली टैंक की गोलीबारी में एक सात साल के बच्चे की जान चली गई। वहीं अल-नस्र इलाके में हुए एक ड्रोन हमले में दो अन्य लोगों की भी मौत हो गई। स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह पुष्टि की है कि अक्टूबर 2025 में अमेरिका समर्थित संघर्ष विराम लागू होने के बाद से अब तक 1,344 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 4,464 लोग घायल हुए हैं।

युद्धविराम का उल्लंघन और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया

हमास के अधिकारियों ने इजरायल पर संघर्ष विराम समझौते का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि इजरायली सेना इस समय एन्क्लेव के अनुमानित 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए है। दूसरी ओर, इजरायली सैन्य प्रवक्ताओं ने जानकारी दी कि उनके सैनिक एक हमास के लड़ाकू को निशाना बना रहे थे और वे वर्तमान में इन हमलों के परिणामों की जांच कर रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस मानवीय स्थिति को बेहद दयनीय और असहनीय बताया है। कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों के विदेश मंत्रियों ने फिलिस्तीनियों के संभावित विस्थापन को लेकर इजरायली अधिकारियों के बयानों की कड़ी निंदा की है। इन देशों का कहना है कि ऐसे बयान शांति प्रयासों को कमजोर करते हैं और अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करते हैं। इस पूरी स्थिति की आधिकारिक जानकारी इजरायल के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी रिपोर्टों पर आधारित है।

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