अमेरिका में ईरान के मुद्दे पर छिड़ी बड़ी बहस, रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं में उम्र को लेकर दिखा बड़ा अंतर.

Aanya11 September 20263 min read36 viewsWorld
अमेरिका में ईरान के मुद्दे पर छिड़ी बड़ी बहस, रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं में उम्र को लेकर दिखा बड़ा अंतर.

टेक्सास के डलास शहर में इन दिनों रिपब्लिकन पार्टी का मिडटर्म कन्वेंशन चल रहा है, जहां ईरान के साथ चल रहे अमेरिकी युद्ध को लेकर पार्टी के भीतर ही बड़ा वैचारिक मतभेद सामने आ गया है। इस सम्मेलन की शुरुआत 10 सितंबर 2026 को हुई और यह 11 सितंबर 2026 तक चलेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य आगामी नवंबर के चुनावों के लिए रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन जुटाना और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पार्टी का मुख्य चेहरा बनाए रखना है। आरएनसी के चेयरमैन जो ग्रुटरर्स ने इस आयोजन को रिपब्लिकन एजेंडे को डेमोक्रेट विकल्पों के सामने पेश करने का एक बड़ा मंच बताया है, लेकिन इसके बावजूद ईरान के साथ चल रहा संघर्ष इस सभा में सबसे बड़ा और मुख्य मुद्दा बन गया है।

राष्ट्रपति ट्रंप का बयान और चुनाव से जुड़ी बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सम्मेलन के दौरान बुधवार और गुरुवार को मुख्य भाषण दिए और अपने इस सैन्य कदम का खुलकर बचाव किया। उन्होंने दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने के बहुत करीब है और वह सिर्फ कुछ ही हफ्तों की दूरी पर है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस युद्ध की वजह से अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है, खासकर डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि नवंबर के चुनावों के तुरंत बाद यह युद्ध समाप्त हो जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान इस तरह की हरकतों से अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है, जिसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।

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युवाओं और बुजुर्गों की सोच में आया बड़ा अंतर

राष्ट्रपति ट्रंप की इस रणनीति और युद्ध नीति के कारण पार्टी के भीतर ही असंतोष की आवाजें उठने लगी हैं। पार्टी के युवा समर्थकों ने इस पर खुलकर अपनी नाराजगी जताई है, जिसमें यंगर अमेरिकन्स फॉर लिबर्टी से जुड़े 25 वर्षीय बेंजामिन विलियम्स और ऑबर्न यूनिवर्सिटी के छात्र सीन ओब्रायन शामिल हैं। इन युवाओं ने खुद को ठगा हुआ महसूस किया और कहा कि यह सैन्य अभियान राष्ट्रपति ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के बिल्कुल खिलाफ है। इस बात की पुष्टि हालिया सर्वे के आंकड़ों से भी होती है, जहां मार्च 2026 के एक प्यू रिसर्च सर्वे में सामने आया कि 18 से 29 वर्ष की आयु वाले केवल 49 प्रतिशत रिपब्लिकन समर्थकों ने ही राष्ट्रपति के इस कदम का समर्थन किया, जबकि 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों में यह समर्थन का आंकड़ा 84 प्रतिशत था। इप्सोस के एक अन्य सर्वे में भी यह बात सामने आई कि ट्रंप के मतदाताओं के बीच इस युद्ध को लेकर उम्र के आधार पर 45 अंकों का एक बड़ा अंतर मौजूद है।

बुजुर्गों का समर्थन और क्षेत्रीय तनाव

दूसरी तरफ, पार्टी के वरिष्ठ और बुजुर्ग नेता अभी भी राष्ट्रपति के इस रुख के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। ऐसे ही एक समर्थक 70 वर्षीय जो रोपर हैं, जो एक सेवानिवृत्त रक्षा ठेकेदार हैं। उन्होंने इस सैन्य कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि ईरान पिछले कई दशकों से आक्रामक रुख अपनाता रहा है, इसलिए यह जवाबी कार्रवाई करना देश के लिए बहुत जरूरी था। यह पूरी बहस ऐसे समय में हो रही है जब खाड़ी और मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। 11 सितंबर 2026 को यह बड़ी खबर सामने आई कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक अमेरिकी 'सेल ड्रोन' को पकड़ लिया है। इसके साथ ही, यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस सेंटर ने यह जानकारी दी कि ओमान के तट के पास दो जहाजों पर मिसाइलों से हमला किया गया है, और यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मोचा के रणनीतिक बंदरगाह पर भी कब्जा कर लिया है, जिससे बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर उनका नियंत्रण और अधिक मजबूत हो गया है। डलास में जमीन पर रहकर इन सभी बड़ी घटनाओं की कवरेज अल जजीरा इंग्लिश की संवाददाता एम्मा विदरो कर रही हैं।

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