Dubai: सोना हुआ सस्ता, अमेरिका और ईरान के तनाव के बीच कीमतों में आई भारी गिरावट.

दुनियाभर में सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है और यह अपने दो हफ्ते के सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया है। 1 सितंबर 2026 को वैश्विक बाजार में हाजिर सोना यानी स्पॉट गोल्ड $4,430 से $4,454 प्रति औंस के बीच कारोबार कर रहा है। पिछले हफ्ते के रिकॉर्ड उच्च स्तर से सोने की कीमतों में करीब $300 की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बाजार के जानकारों का मानना है कि यह स्थिति भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण पैदा हुई है। गल्फ देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों और निवेशकों के लिए यह समय काफी उतार-चढ़ाव वाला चल रहा है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजारों की हलचल का असर सीधे तौर पर स्थानीय बाजारों और निवेश पर पड़ता है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर
अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष के बाद मध्य पूर्व में तनाव काफी बढ़ गया है। 30 और 31 अगस्त 2026 के दौरान अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के लार्नैक द्वीप पर रॉकेट लॉन्चर्स को निशाना बनाकर हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी एयर बेस पर हमले किए और 31 अगस्त 2026 को संयुक्त अरब अमीरात के अल मिनहाद एयर बेस पर ड्रोन हमले का दावा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस पर कड़ी चेतावनी देते हुए ईरान को और भी कड़े सैन्य हमलों का सामना करने की बात कही है। इस तरह के क्षेत्रीय तनावों के बीच निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल है, जो सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने के दाम पर सीधा असर डाल रहा है।
फेडरल रिजर्व की नीतियां और ब्याज दरें
सोने की कीमतों पर दबाव बनाने में फेडरल रिजर्व के बयानों की भी बड़ी भूमिका रही है। जैक्सन होल संगोष्ठी में 28 अगस्त 2026 को फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉर्श ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा था कि अगर महंगाई दर स्पष्ट रूप से 2 प्रतिशत के लक्ष्य की ओर नहीं आती है, तो फेडरल रिजर्व को और कड़े कदम उठाने होंगे। इसके बाद से CME FedWatch Tool के आंकड़े बताते हैं कि आगामी फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक, जो 15-16 सितंबर 2026 को होनी है, उसमें ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना 65 से 66 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
बॉन्ड यील्ड और लेबर मार्केट डेटा का प्रभाव
आईजी के सीनियर मार्केट एनालिस्ट टोनी साइकॉम ने बताया कि इन सभी आर्थिक और राजनीतिक विकासक्रमों के कारण बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है, जिससे सोने का आकर्षण कम हुआ है और यह कमजोर स्थिति में आ गया है। निवेशक अब अमेरिका के आने वाले श्रम बाजार के आंकड़ों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, जिसमें जॉब ओपनिंग्स, एडीपी रोजगार रिपोर्ट और नॉनफार्म पेरोल शामिल हैं। इसके अलावा, इंडसइंड सिक्योरिटीज के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट जिगर त्रिवेदी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि बढ़ते तेल के दाम महंगाई के दबाव को और बढ़ा रहे हैं, जिससे फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें मजबूत होती हैं और सोने की कीमतों में ज्यादा ऊपर जाने की गुंजाइश सीमित हो जाती है।
| विवरण (Details) | तारीख या आंकड़े (Data) |
|---|---|
| गोल्ड प्राइस रेंज (Spot Gold) | $4,430 - $4,454 प्रति औंस |
| कीमतों में हालिया गिरावट | पिछले उच्च स्तर से करीब $300 की कमी |
| ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना | 65-66% (25 बेसिस पॉइंट) |
| अगली FOMC बैठक की तारीख | 15-16 सितंबर 2026 |