मध्य पूर्व में तनाव से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर, 100 डॉलर के करीब पहुँचा भाव.

मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव और सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों पर बहुत बुरा असर पड़ा है। 8 सितंबर 2026 को दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँच गईं। इस संकट से खाड़ी देशों में रह रहे लोगों और भारत से आने-जाने वाले यात्रियों की चिंता भी बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई और यात्रा खर्च पर पड़ सकता है। आम आदमी की भाषा में समझें तो दुनिया भर में ईंधन महंगा होने से रोजमर्रा की चीजें भी महंगी हो सकती हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल
ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर लगभग 98.25 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट यानी WTI चढ़कर 93.70 डॉलर पर पहुँच गया। यह लगातार तीसरा दिन था जब तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली। डीबीएस बैंक के वित्तीय विश्लेषक सुव्रो सरकार ने चेतावनी दी है कि यह अस्थिरता साल 2027 तक बाजार के जोखिम को प्रभावित कर सकती है। वहीं एएनजेड के डेनियल हेइंस ने बताया कि फारस की खाड़ी से तेल की सप्लाई में कमी साल 2027 की शुरुआत तक बनी रह सकती है, जिससे पूरी दुनिया में चिंता का माहौल है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में संघर्ष और अमेरिका-ईरान तनाव
यह बाजार की गिरावट उस समय शुरू हुई जब संघर्ष काफी बढ़ गया। 7 सितंबर को होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के बीच गोलीबारी हुई। इस इलाके में जहाजों की आवाजाही पिछले मई महीने के बाद से सबसे निचले स्तर पर आ गई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के बाद तीन ईरानी जहाजों पर हमलों की पुष्टि की। इसके जवाब में ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबफ और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रजाई ने खाड़ी के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले की धमकी दी और होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर एक प्रतिबंधित क्षेत्र बनाने की योजना का ऐलान किया।
सऊदी अरब के शहरों पर हमले और आधिकारिक बयान
इसी दौरान हौथी विद्रोहियों ने 8 सितंबर को सऊदी अरब के चार शहरों पर हमले किए, जिससे 70 से अधिक लोग घायल हो गए और तेल प्रतिष्ठानों में आग लग गई। सऊदी अधिकारियों, जिनमें प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की भी शामिल हैं, ने देश की संप्रभुता की रक्षा करने की कसम खाई और इस आक्रामकता को तुरंत रोकने की मांग की। सऊदी राजनीतिक विश्लेषक खालिद बतार्फी ने सुझाव दिया कि यह संघर्ष लंबे समय तक नहीं चलेगा। इसके बावजूद डेनमार्क, ब्रिटेन और कनाडा समेत 18 देशों के एक वैश्विक शिपिंग संगठन ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा की नाजुक हालत पर गहरी चिंता जताई है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर और भविष्य की आशंकाएं
मार्केट के बड़े विशेषज्ञ कई बातों पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं। कैपिटल डॉट कॉम के काइल रोड्डी ने बताया कि भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। इसके अलावा, गोल्डमैन सैक्स के जिंस शोधकर्ता डान स्ट्रुइवेन ने चेतावनी दी कि यदि शिपिंग में रुकावटें बढ़ती हैं, तो तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। इस बीच अमेरिकी सेना अपनी क्षेत्रीय ताकत में बदलाव करने पर विचार कर रही है, जिसके तहत कुछ सैन्य सुविधाओं को जमीन के नीचे भी शिफ्ट किया जा सकता है। हिंसा की अन्य घटनाओं में 8 सितंबर को इजरायली बलों ने ना Nablus के पास एक फिलिस्तीनी व्यक्ति को मार डाला, जबकि दक्षिणी लेबनान में 7 सितंबर को हुए इजरायली हमलों में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई थी।