Gulf Remittance: यूएई में रुपया हुआ मजबूत, भारतीय प्रवासियों के लिए बढ़ी मुश्किलें और चिंताएं

खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीय प्रवासियों के लिए एक तरफ जहां मजबूत करेंसी के चलते घर पैसे भेजना फायदेमंद साबित हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा और अपनों के लापता होने की खबरों ने परिवारों की नींद उड़ा दी है। UAE dirham का रेट भारतीय रुपये के मुकाबले बढ़कर 26.15 Indian rupees से ज्यादा हो गया है, जो पिछले कई सालों में सबसे मजबूत स्तर पर है। इस बेहतरीन एक्सचेंज रेट के कारण दुबई और अबू धाबी के एक्सचेंज हाउसों में इन दिनों भारी भीड़ देखने को मिल रही है और केरल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना और बिहार जैसे राज्यों में रहने वाले परिवारों के पास रिकॉर्ड मात्रा में रेमिटेंस भेजा जा रहा है। लेकिन इस आर्थिक राहत के बीच खाड़ी में रह रहे हमारे देश के लोगों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे आम आदमी और उनके रिश्तेदारों में डर का माहौल बना हुआ है।
लापता और जेल में फंसे भारतीय workers की बढ़ रही परेशानी
पैसे कमाने के लिए खाड़ी देशों का रुख करने वाले कई परिवारों के अपने अब उनसे दूर हो गए हैं और उनका कोई अता-पता नहीं चल रहा है। तेलंगाना के प्रवासी मजदूरों की सहायता करने वाली संस्था 'Pravasi Prajavani' के अनुसार, राज्य के 8 workers पूरी तरह से गायब हो चुके हैं, जिनसे परिवारों का संपर्क लंबे समय से टूट गया है। इनमें ओमान में अचानक गायब हुए Mohammed Sileman, यूएई में लापता हुए Alleswarapu Ramesh, सऊदी अरब में लापता Malut Kotaiah और 7 June से दुबई से गायब चल रहे Bhukya Srikanth जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा हैदराबाद के रहने वाले Mohammed Afroz पिछले करीब two years से जेद्दा के Al-Shumaisi Detention Centre में बंद हैं, जबकि मैसूरु के Salman Fariz को वेतन विवाद और जरूरी यात्रा दस्तावेज न होने के कारण दुबई की एक जेल में कैद करके रखा गया है। इन सभी मामलों को लेकर चिंतित सामाजिक कार्यकर्ताओं ने देश के विदेश मंत्री S. Jaishankar को पत्र लिखकर तुरंत सरकारी दखल देने की मांग की है ताकि इन फंसे हुए लोगों को सुरक्षित वापस लाया जा सके।
क्षेत्रीय तनाव और मिसाइल हमलों से सहमे प्रवासी
कामगारों के सामने केवल नौकरी या कागजात का संकट ही नहीं है, बल्कि क्षेत्रीय संघर्ष के कारण उनकी जान पर भी लगातार खतरा मंडरा रहा है। हाल ही में September 14 को यमन की तरफ से किए गए हमलों में हौथी मिसाइलों और ड्रोनों ने सऊदी अरब के उन शहरों को निशाना बनाया जहां भारतीय लोग बहुत बड़ी संख्या में रहते हैं। इन हमलों की चपेट में आने वाले प्रमुख शहरों में Khamis Mushait, Abha और Taif शामिल हैं, जहां हुए हमलों की वजह से कुल 13 people घायल हो गए। इन हमलों में सात घरों और दो गाड़ियों को भारी नुकसान पहुंचा तथा September 17 तक तائف शहर में कम से कम एक व्यक्ति की मौत होने की आधिकारिक पुष्टि भी हुई है। सऊदी अरब में इस समय ढाई लाख से ज्यादा नहीं बल्कि कुल 2.4 million Indian nationals रहते हैं, जिसके कारण इस तरह की सैन्य कार्रवाइयों ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय के दिलों में भारी डर पैदा कर दिया है। नई दिल्ली में मौजूद सरकारी सूत्रों ने बताया है कि भारतीय दूतावास और मिशन वहां के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जबकि खाड़ी देशों की सरकारों का यह कहना है कि उनके यहां मजदूरों की सुरक्षा और वेतन देने के नियम पूरी तरह से सही ढंग से काम कर रहे हैं।