Himalayan Floods: हिमालय में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही, नेपाल और चीन में 1100 से ज्यादा लोगों की मौत.

हिमालयी क्षेत्र में आए भीषण बर्फीले तूफान और ग्लेशियर टूटने की घटना को एक हफ्ता पूरा हो चुका है, लेकिन वहां बचाव और राहत कार्य अभी भी बहुत तेजी से जारी हैं। 26 अगस्त 2026 को हुई इस भयानक घटना के बाद अचानक आई बाढ़ ने चारों तरफ तबाही मचा दी थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2 सितम्बर 2026 तक अकेले नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,127 हो गई है, जबकि चीन में भी 16 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इस आपदा ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ दुनिया भर के पर्यटकों और अधिकारियों को भी गहरी चिंता में डाल दिया है।
लापता लोगों की तलाश और राहत कार्य
नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी यानी NDRRMA के मुताबिक, नेपाल में लगभग 4,858 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, एक अन्य रिपोर्ट में 4,462 लोगों के लापता होने की बात कही गई है, जिसमें तिब्बत के 546 लोग भी शामिल हैं। शुरुआती दौर में करीब 4,000 लोग लापता बताए गए थे, जिनमें 583 विदेशी नागरिक और 83 सुरक्षाकर्मी भी शामिल थे। मौजूदा आंकड़ों से पता चलता है कि 39 देशों के लगभग 590 विदेशी नागरिक अभी भी लापता हैं, हालांकि कुछ लोगों ने अधिकारियों से संपर्क कर लिया है। नेपाल में सुरक्षा बलों ने अब तक 6,541 लोगों को सुरक्षित बचाया है, जिनमें 324 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय मदद और बचाव दल
इस आपदा से निपटने के लिए भारत, चीन और अमेरिका से विशेष बचाव दलों को मैदान में उतारा गया है। भारत की तरफ से एक 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम 30 अगस्त से काठमांडू में राहत कार्यों में जुटी हुई है। इसके अलावा, चीन ने राहत कार्यों में मदद के लिए ज्योंग सीमा पार बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण किया है। नेपाल में इस समय 7,912 पुलिसकर्मी सक्रिय रूप से बचाव कार्यों में लगे हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी UNDP का अनुमान है कि इस आपदा की वजह से करीब 2.2 मिलियन टन मलबा इकट्ठा हो गया है। इस आपदा से हुए नुकसान का अनुमान 4 अरब से 7 अरब अमेरिकी डॉलर के बीच लगाया गया है, जिसके चलते नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के फंड से आपातकालीन वित्तीय सहायता की मांग की है। इस बारे में अधिक जानकारी PNA की रिपोर्ट में दी गई है।
जलवायु परिवर्तन का असर और वैश्विक चेतावनी
नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने जोर देकर कहा कि यह आपदा सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन का परिणाम है। इस बात को संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन की कार्यकारी सचिव ने भी दोहराया, और बताया कि गर्म होता मौसम ऐसी घटनाओं की बारूद और गंभीरता को तेजी से बढ़ा रहा है। इस संबंध में विस्तृत बयान UNFCCC की वेबसाइट पर उपलब्ध है। देश के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शीर्ष प्रदूषण फैलाने वाले देशों से वैश्विक जिम्मेदारी निभाने की अपील की है, और इस आपदा को सभ्यता के अस्तित्व से जोड़ा है। वहीं दूसरी ओर, नेपाल के पर्यटन मंत्री खड़क राज पौडेल ने अंतरराष्ट्रीय यात्रियों से आग्रह किया है कि वे हिमालय की यात्रा करना जारी रखें, क्योंकि देश अभी भी पर्यटकों के लिए खुला है। इन तमाम कोशिशों के बावजूद, नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर के वरिष्ठ अधिकारी फणिन्द्र पौडेल ने माना कि जीवित बचे लोगों को ढूंढने की संभावना अब कम होती जा रही है, क्योंकि प्रशासन का ध्यान अब पुनर्वास और निर्माण कार्यों की तरफ शिफ्ट हो रहा है।