Himalayas में भारी तबाही, नेपाल और चीन बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने से 472 लोगों की मौत, 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित.

Nura Basta28 August 20263 min read26 viewsWorld
Himalayas में भारी तबाही, नेपाल और चीन बॉर्डर पर ग्लेशियर फटने से 472 लोगों की मौत, 90 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित.

हिमालयी क्षेत्र में नेपाल और चीन बॉर्डर के पास हुई भयानक प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई है। Red Cross की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खतरनाक लैंडस्लाइड और बाढ़ की वजह से 90,000 से ज्यादा लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। यह दर्दनाक घटना बुधवार, 26 अगस्त 2026 को हुई थी, जिसने देखते ही देखते पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं आए हैं।

मौत का आंकड़ा और लापता लोगों की तलाश

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, मरने वालों की संख्या बढ़कर 472 तक पहुंच गई है। इनमें अकेले नेपाल में 469 लोगों की जान गई है, जबकि तिब्बत में 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, 1,500 से ज्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में कई विदेशी ट्रेकर्स और तीर्थयात्री भी शामिल हैं, जिनकी तलाश के लिए सुरक्षा बल लगातार जुटे हुए हैं।

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ग्लेशियर टूटने से मची तबाही

शुरुआत में इस आपदा को 4.4 तीव्रता का भूकंप समझा गया था, लेकिन बाद में US Geological Survey ने साफ किया कि यह दरअसल 5.2 तीव्रता का ग्लेशियर कोलैप्स था। इसकी वजह से भारी मात्रा में मलबा सीधे Bhotekoshi River में आ गिरा और भयंकर बाढ़ आ गई। चीनी सरकारी भूवैज्ञानिक Guo Zhaocheng ने इस मलबे के बहाव की रफ्तार और फैलाव को बहुत खतरनाक बताया है। वहीं, GFZ Helmholtz Centre के Niels Hovius ने कहा है कि हिमालय में इस तरह की फ्लैश फ्लड की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। नेपाल सेंटर फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट के Bishal Nath Upreti ने बताया कि प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना बहुत मुश्किल साबित हो रहा है।

बांध टूटने और बाढ़ का नया खतरा

तिब्बत में ढहे हुए बांध के पीछे मलबे की वजह से एक झील बन गई है, जिसके ओवरफ्लो होने से बाढ़ का खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। चीन के Ministry of Water Resources के अनुसार, गुरुवार को इस झील में 70 मिलियन क्यूबिक फीट पानी था और अगले तीन दिनों में इसमें 106 मिलियन क्यूबिक फीट और पानी आने की आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए दोनों देशों के प्रशासनिक अधिकारियों ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए तुरंत घर खाली करने का आदेश जारी कर दिया है। कुछ जगहों पर सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए नेपाल पुलिस के प्रवक्ता Abi Narayan Kafle और नेपाल आर्मी की देखरेख में चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोकना भी पड़ा, और चीनी कर्मियों को सुरक्षित ऊंचाई वाले स्थानों पर जाना पड़ा।

राहत और बचाव कार्य

नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने जानकारी दी है कि आपदा क्षेत्र से अब तक 3,253 लोगों को एयरलिफ्ट करके सुरक्षित बाहर निकाला गया है। अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक सुरंग में फंसे करीब 100 लोगों को निकालने के लिए अभियान अभी भी जारी है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने 28 अगस्त को स्पष्ट किया था कि देश को फिलहाल विदेशी सर्च-एंड-रेस्क्यू मदद की जरूरत नहीं है, लेकिन दूसरे जरियों से सहायता लगातार पहुंच रही है। संयुक्त राष्ट्र यानी United Nations ने अपने सेंट्रल इमरजेंसी रिस्पांस फंड से $2 मिलियन की राशि मंजूर की है। इसके अलावा, अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आपदा प्रतिक्रिया सलाहकार भेजने के साथ-साथ $500,000 की आपातकालीन सहायता का ऐलान किया है, जबकि दक्षिण कोरिया भी आगे की मदद को लेकर बातचीत कर रहा है।

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