यमन में बड़ा तनाव, हौथी विद्रोहियों ने रखी मांग, कहा- जब तक हमला बंद नहीं होगा तब तक नहीं रुकेगी जंग

मध्य पूर्व में हालात एक बार फिर से बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं और आम जनता की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। 10 सितंबर 2026 को यमन के हौथी आंदोलन ने एक बड़ा ऐलान किया जिसमें उन्होंने साफ कहा कि उनकी तरफ से चल रही सैन्य गतिविधियां तभी बंद होंगी जब यमन पर हमले पूरी तरह रोक दिए जाएंगे और वहां लगाए गए नाकेबंदी को खत्म किया जाएगा। इस ताजा घोषणा के बाद से क्षेत्र में हिंसा काफी ज्यादा बढ़ गई है और साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मदद से हुए संघर्षविराम के टूटने के बाद यह सबसे बड़ा टकराव माना जा रहा है।
मोखा बंदरगाह और लाल सागर पर बड़ा कब्जा
उसी दिन हौथी सेना ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाकों पर कब्जा कर लिया। उन्होंने लाल सागर के बंदरगाह शहर मोखा पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया जो बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास स्थित है और वैश्विक शिपिंग के लिए बहुत अहम रास्ता माना जाता है। इसके अलावा हौथी लड़ाकों ने जुकार द्वीप और होदेइदाह प्रांत के हेस तथा अल खौखाह जिलों पर भी कब्जा जमा लिया। सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल और हौथियाें के बीच पिछले 3 सितंबर 2026 से लगातार भारी लड़ाई चल रही है जिसमें जमीन पर आमने-सामने की जंग के साथ-साथ दर्जनों हवाई हमले भी शामिल हैं।
सऊदी अरब के शहरों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले
इन तमाम घटनाओं के बीच हौथी लड़ाकों ने सऊदी अरब के कई प्रमुख शहरों जैसे कि अभा, खमीस मुशैत, जाज़ान और नजरान को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इन हमलों की वजह से दर्जनों आम नागरिकों के घायल होने की खबर है और वहां की ऊर्जा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं को भी अस्थायी तौर पर नुकसान पहुंचा है। हौथी संगठन के प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलम ने इन ऑपरेशनों को अपनी रक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया है। उनका यह भी दावा है कि लाल सागर और बाब अल-मंदेब में अंतरराष्ट्रीय नौवहन अभी भी पूरी तरह सुरक्षित है। दूसरी तरफ सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने कहा कि वे देश की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी जिम्मेदारी के साथ जवाब देंगे।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और तेल की कीमतों पर असर
इस पूरे मामले पर दुनिया भर के देशों की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ब्रिटेन और जर्मनी ने हौथी हमलों की कड़ी निंदा की है। ब्रिटिश सरकार ने साफ तौर पर कहा कि इस बिगड़ते मानवीय संकट और व्यापारिक रास्तों पर मंडराते खतरों की पूरी जिम्मेदारी हौथी विद्रोहियों की है और साथ ही उन्होंने सऊदी अरब तथा यमन की सरकार के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया। अल जजीरा के लिए लिखते हुए सऊदी टिप्पणीकार खालिद एम. बतार्फी ने बताया कि यह तनाव सऊदी की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिति के लिए बहुत बड़ा खतरा है। इस क्षेत्रीय अस्थिरता और ईरान के साथ चल रहे तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं जिससे आम आदमी के जीवन पर महंगाई का असर पड़ना तय है।