Yemen Conflict: मोचा पोर्ट पर हौथी लड़ाकों का कब्जा, बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के पास बढ़ा तनाव.

क्षेत्रीय संघर्ष में एक बड़ा तनाव तब देखा गया जब ईरान समर्थित हौथी लड़ाकों ने 10 सितंबर 2026 को यमन के रणनीतिक लाल सागर बंदरगाह शहर मोचा पर अपना कब्जा जमा लिया। इस सैन्य कार्रवाई के बाद हौथी सेनाएं वैश्विक तेल, गैस और खाद्य आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण मार्ग माने जाने वाले बाब अल-मदब जलडमरूमध्य के और अधिक करीब पहुंच गई हैं। सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, हौथी बल सीधे जलडमरूमध्य पर स्थित धुबाब की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और उन्होंने दक्षिणी लाल सागर में स्थित जुकर द्वीप पर भी अपना नियंत्रण पूरी तरह से स्थापित कर लिया है।
लाल सागर के तट पर भीषण संघर्ष और मानवीय संकट
लाल सागर के तटीय इलाकों में पिछले एक हफ्ते के दौरान हुई भयंकर झड़पों में मुख्य रूप से लड़ाकों सहित 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता से हुए संघर्षविराम के बाद से यह क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा और खतरनाक सैन्य टकराव माना जा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सऊदी अरब की सेना ने हौथी ठिकानों पर करीब 40 से 50 हवाई हमले किए हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार इस हिंसा का मानवीय जीवन पर बहुत बुरा असर पड़ा है और मात्र चार दिनों के भीतर लगभग 20,000 परिवार अपने घरों को छोड़ने के लिए मजबूर हो चुके हैं।
इस पूरे संघर्ष में मरने और घायल होने वाले लोगों की कुल संख्या लगभग 1,000 तक पहुंच गई है। हाल ही में हुई हिंसा के दौरान सऊदी अरब के एक हवाई हमले में जेल को निशाना बनाया गया जिसमें 32 लोगों की मौत हो गई और 7 लोग घायल हो गए। इससे पहले भी एक अन्य जेल पर हुए हमले में 11 लोगों के मारे जाने की खबर सामने आई थी। इसके जवाब में सऊदी अरब के चार दक्षिण-पश्चिमी शहरों में हौथी गुट की तरफ से दागे गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से कुल 73 लोग घायल हुए हैं।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और वैश्विक बाजारों पर असर
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दुनिया भर के देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। हौथी प्रवक्ता मोहम्मद अब्दुलसलाम का कहना है कि समुद्री नेविगेशन अभी भी पूरी तरह सुरक्षित है और उनकी तरफ से की जा रही कार्रवाई केवल रक्षात्मक है। इसके विपरीत, यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के सदस्य तारेक सालेह ने इस आक्रामक हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की बात कही है। यमन में अमेरिकी दूतावास ने भी हौथी गतिविधियों की कड़ी निंदा करते हुए उन पर अरब देशों की एकता को कमजोर करने के लिए ईरान के प्रॉक्सी के रूप में काम करने का आरोप लगाया है।
इस बढ़ते तनाव का सीधा असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिल रहा है और कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 100 से 102 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। जुलाई महीने में हौथी द्वारा सऊदी अरब की नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा के बाद से ही बाब अल-मदब जलडमरूमध्य से होने वाले कार्गो जहाजों का यातायात पहले ही काफी धीमा हो गया था। सुरक्षा जानकारों का मानना है कि भले ही इस जलडमरूमध्य का पूरी तरह से बंद होना अभी एक दूर की कौड़ी हो, लेकिन लगातार जारी यह संघर्ष वैश्विक शिपिंग और व्यापार के लिए गहरी अनिश्चितता पैदा कर रहा है।