Yemen Crisis: हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के मोखा बंदरगाह पर किया कब्जा, सऊदी समर्थित बलों को पीछे हटना पड़ा

यमन में क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है और हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के बेहद अहम मोखा बंदरगाह पर अपना कब्जा जमा लिया है। यह बड़ी घटना गुरुवार, 10 सितंबर 2026 को सामने आई है, जब सऊदी समर्थित सरकार के बलों और विद्रोहियों के बीच कई दिनों तक भीषण जंग चली। साल 2022 में हुए संघर्ष विराम के बाद से ईरान समर्थित हूती समूह की यह अब तक की सबसे बड़ी और ताकतवर सैन्य बढ़त मानी जा रही है। शहर के हालात बहुत ज्यादा खराब हो चुके हैं, जहां आम बाजारों में दुकानें पूरी तरह से बंद हैं और आने-जाने वाले सभी मुख्य रास्तों को सुरक्षा के लिहाज से बंद कर दिया गया है। स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने बताया कि शहर पर कब्जा करने के बाद हूती लड़ाके हर तरफ सड़कों पर घूम रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि एक स्थानीय अस्पताल पर कब्जा होने के बाद वहां काम करने वाले तीन डॉक्टर अपनी जान बचाकर तुरंत भाग निकले।
यमन सैन्य और सरकार की प्रतिक्रिया
यमन के एक सैन्य अधिकारी ने फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी को शहर के हाथ से निकल जाने की बात पूरी तरह से कन्फर्म की है। उन्होंने बताया कि विद्रोही लगातार आगे बढ़ते हुए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की तरफ बढ़ रहे हैं। नेशनल रेजिस्टेंस फोर्सेज के बड़े कमांडरों और हूती राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य हजाम अल-असद ने शहर के कई मुख्य इलाकों और ऊंची पहाड़ियों पर कब्जा होने की बात स्वीकार की है। यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल के उपाध्यक्ष तारेक सालेह ने भी यह बात मानी है कि सरकारी यूनिट्स, जिसमें नेशनल रेजिस्टेंस, जायंट्स ब्रिगेड्स और नेशंस शील्ड शामिल हैं, को इस संघर्ष में काफी नुकसान और casualties उठानी पड़ी हैं। इसके बाद तारेक सालेह ने अरब गठबंधन के साथ मिलकर काम करने के लिए एक वैकल्पिक कमांड सेंटर बनाने का आदेश जारी कर दिया है ताकि सैनिकों को फिर से संगठित किया जा सके।
गठबंधन के हवाई हमले और नागरिक सुरक्षा
हूती विद्रोही अब यमन के पश्चिमी तट पर लगभग 2,600 वर्ग किलोमीटर के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण बना चुके हैं, जिसमें हेस और अल-खवखा शहर के साथ-साथ जुकार द्वीप भी शामिल है। इस बड़े और खतरनाक सैन्य आक्रमण के जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए लगभग 54 हवाई हमले किए हैं। इनमें से करीब 40 airstrikes पिछले 24 घंटों के भीतर ही ताएज, होदेइदा, अल-जौफ और मारिब गवर्नरेट के अलग-अलग इलाकों में की गईं। दूसरी तरफ, सऊदी अरब ने आधिकारिक तौर पर जानकारी दी है कि हाल ही में हुए कई बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन हमलों की वजह से विभिन्न शहरों में कम से कम 73 नागरिक घायल हो चुके हैं। इन लगातार हमलों के कारण आम जनता की जिंदगी थम सी गई है और लोग अपने घरों में दुबकने को मजबूर हैं।
अंतर्राष्ट्रीय चिंता और पाकिस्तान की चेतावनी
लाल सागर के इस बेहद व्यस्त समुद्री मार्ग यानी बाब अल-मंदेब की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में चिंताएं बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं। दो अलग-अलग ईरानी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तेहरान ने हूती विद्रोहियों को और अधिक फंडिंग और हथियार देने का वादा किया है और उन्हें सऊदी अरब पर दबाव बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान ने ईरान को एक औपचारिक चेतावनी जारी कर दी है। पाकिस्तान ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर किसी भी तरह की उकसावे की कार्रवाई या आक्रामकता होती है, तो सऊदी अरब के साथ उसका पुराना रक्षा समझौता लागू किया जा सकता है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में हलचल और तेज हो गई है।