यमन में बड़ा तनाव, हौथी विद्रोहियों ने किया रणनीतिक मोखा पोर्ट पर कब्ज़ा, भड़के सऊदी अरब ने की एयरस्ट्राइक

यमन के संघर्ष में एक बार फिर से बहुत बड़ा तनाव देखने को मिल रहा है, जहां ईरान समर्थित हौथी विद्रोही गुट ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर पूरी तरह से अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है। यह घटना 11 सितंबर 2026 की है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। इस कब्जे के बाद वैश्विक व्यापार के रास्तों पर एक बहुत बड़ा संकट मंडराने लगा है क्योंकि हौथी ताकतों का प्रभाव अब महत्वपूर्ण बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य तक फैल चुका है। शहर पर कब्जा करने के तुरंत बाद, हौथी बलों ने दक्षिणी लाल सागर में जुकार द्वीप पर भी अपना नियंत्रण होने की बात कही है।
सऊदी अरब और यमन सरकार का पलटवार
हौथी विद्रोहियों के इस खतरनाक आगे बढ़ने के जवाब में, सऊदी सैन्य बलों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मोखा एयरपोर्ट के पास हौथी ठिकानों पर दो हवाई हमले किए। इसके साथ ही, यमन की सरकारी सेना ने भी ताज़ के पश्चिम में मौजूद हौथी reinforcements यानी अतिरिक्त सैन्य बलों पर अपना हवाई हमला शुरू कर दिया है। इन सभी सैन्य गतिविधियों से यह साफ संकेत मिल रहा है कि अप्रैल 2022 से चल रहा संयुक्त राष्ट्र समर्थित संघर्षविराम अब पूरी तरह से समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है।
हौथी प्रवक्ता की चेतावनी और माफी का ऐलान
हौथी सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याहया सaree ने साफ शब्दों में यह दोहराया है कि हौथी नियंत्रित क्षेत्रों पर होने वाले किसी भी हमले का करारा जवाब दिया जाएगा और उसे बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, इस विद्रोही समूह ने सरकारी सैनिकों के लिए एक फरमान जारी करते हुए माफी और पूरी छूट देने की घोषणा की है, जो अपनी मर्जी से हथियार डाल देंगे।
ग्लोबल ट्रेड और तेल की कीमतों पर असर
मोखा शहर के हाथ से निकलने के कारण लाल सागर के शिपिंग लेन की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में तुरंत चिंता बढ़ गई है। यह रास्ता ग्लोबल ट्रेड और तेल की सप्लाई के लिए बहुत ही जरूरी माना जाता है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक से काफी तेजी देखने को मिली है। विश्लेषकों का मानना है कि हौथियो की यह चाल बड़े ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच एक दूसरा मोर्चा खोलने की कोशिश है।
क्षेत्रीय तनाव और पुरानी घटनाएं
यह ताज़ा घटनाक्रम जुलाई 2026 की उस घटना के बाद सामने आया है, जिसमें यमन रक्षा मंत्रालय ने एक अनाधिकृत ईरानी विमान को रोकने के लिए सना एयरपोर्ट के रनवे पर हमला किया था। हालांकि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच एक रक्षा समझौता पहले से मौजूद है, लेकिन जानकारों का कहना है कि उसका रक्षात्मक दायरा यमन में चल रहे मौजूदा सऊदी सैन्य अभियानों पर असर डालने की संभावना नहीं रखता है।