हूती मिसाइल हमलों से सऊदी अरामको मुख्यालय और रियाद में नुकसान

यमन के हूती विद्रोहियों के मिसाइल हमलों में दहरान में अरामको की इमारत और रियाद के रिहायशी इलाकों में नुकसान हुआ। चार नागरिक घायल हुए।

Mohd. Irfan14 October 20262 min read7 viewsSaudi
हूती मिसाइल हमलों से सऊदी अरामको मुख्यालय और रियाद में नुकसान

रियाद: यमन के ईरान समर्थित हूती बलों ने 13 और 14 अक्टूबर 2026 के बीच सऊदी अरब के अहम ढांचों को निशाना बनाकर मिसाइल हमले किए। एक बैलिस्टिक मिसाइल दहरान में सऊदी अरामको के मुख्यालय की एक प्रशासनिक इमारत से टकराई, जिससे कई मंजिलों को भारी नुकसान पहुंचा।

अरामको के मुख्यालय में आग लगी और छतें गिर गईं, जबकि कई खिड़कियों के शीशे टूट गए। इमारत में सीईओ अमीन नासर का दफ्तर भी प्रभावित हुआ। इस जगह पर किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

उसी समय सऊदी सिविल डिफेंस ने बताया कि रियाद के रिहायशी इलाकों में दो रोकी गई हूती क्रूज मिसाइलों का मलबा गिरा। इस घटना में एक पुरुष, दो महिलाएं और एक बच्चा घायल हुए, और 15 घरों को नुकसान पहुंचा।

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ये हमले वीकेंड पर रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले के बाद हुए हैं। उस हमले में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई, जिनमें एक भारतीय नागरिक और एक पाकिस्तानी निवासी शामिल हैं। 300 से ज्यादा लोग घायल हुए।

रियाद का मुख्य एयरपोर्ट कम से कम शनिवार तक बंद रहेगा। इससे फ्लायदुबई, इतिहाद और कतर एयरवेज जैसी प्रमुख एयरलाइनों की उड़ानें प्रभावित हो रही हैं। जवाब में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने सना और यमन के पश्चिमी हिस्से में हूती ईंधन डिपो और ऊर्जा ढांचों पर जवाबी हमले किए।

हूती नेतृत्व ने सऊदी एयरपोर्टों और तेल ठिकानों को निशाना बनाते रहने की चेतावनी दी है और अंतरराष्ट्रीय कर्मचारियों से निकलने को कहा है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के मुताबिक लड़ाई के कारण यमन में 8 लाख लोगों तक खाने की मदद नहीं पहुंच पा रही, जिनमें 6 लाख लोग तैज़ में हैं। मारिब और लाल सागर तट के मेडिकल केंद्र हर हफ्ते 700 से ज्यादा नए ट्रॉमा मरीजों को संभाल रहे हैं और वहां हैजा के संदिग्ध मामले भी बढ़े हैं।

तेल की कीमतें 106 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गईं, जिसकी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य और सऊदी ऊर्जा ढांचे को लेकर चिंता बताई गई है। सऊदी शेयर बाजार में गिरावट आई है, हालांकि सऊदी अरब का कहना है कि उसकी ऊर्जा प्रणाली मजबूत है। इस बीच यूएई के नेताओं ने खाड़ी देशों की संयुक्त रक्षा की वकालत की है, और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस पर टिप्पणी की है।

खाड़ी देशों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के बड़ी संख्या में प्रवासी रहते हैं, और उन पर भी इन हालात का असर पड़ रहा है। फिलहाल स्थिति अस्थिर बनी हुई है।

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